बांदा। प्रेम प्रसंग में दिनदहाड़े युवक की हत्या के दोषी को अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने मंगलवार को उम्रकैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। घटना के साढ़े 13 साल बाद फैसला आया। एडीजीसी देवदत्त मिश्रा के मुताबिक, शहर कोतवाली के छिपटहरी (मर्दन नाका) निवासी चंदा उर्फ कैफ उर्फ रसूल खां पुत्र वली मोहम्मद 27 जुलाई 2007 को दिन में ढाई बजे इलेक्ट्रानिक मैकेनिक खाईंपार निवासी आफताब अली (22) को फ्रिज बनवाने के बहाने दुकान से बाइक पर ले गया और चूना भट्ठी (खुटला) के पास उसकी हत्या कर दी।
हत्या करने के बाद परिवार सहित फरार हो गया। पुलिस ने शव बरामद कर मृतक के परिजनों को दुर्घटना से मौत बता दी। 31 जुलाई 2007 को पिता की तरफ से हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई। 4 अगस्त 2007 को पुलिस ने आरोपी को तमंचा समेत गिरफ्तार कर जेल भेजा। पोस्टमार्टम में गोली मारे जाने की पुष्टि हुई। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी देवदत्त मिश्रा और फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रजराज सिंह परिहार ने अदालत में सात गवाह पेश किए। मंगलवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए दोषी पाए गए चंदा उर्फ कैफ उर्फ रसूल खां को धारा 302 में उम्रकैद व 30 हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर तीन माह की और कैद होगी। आर्म्स एक्ट में 3 वर्ष की कैद और 5000 रुपये जुर्माना हुआ। जुर्माना न देने पर 15 दिन और जेल में बिताना होंगे।
कोरोना की आड़ में नहीं आया था अदालत
बांदा। उम्रकैद की सजा पाए चंदा उर्फ कैफ (छिपटहरी, मर्दन नाका) कई माह से पेशी में अदालत नहीं आया था। इस पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया था। पुलिस उसे खोज नहीं पाई। इस पर अदालत ने कुर्की के आदेश दिए। अभियुक्त के दरवाजे पर पुलिस ने बाजे-गाजे के साथ नोटिस चस्पा की। परिजनों ने अदालत में सफाई दी कि कोरोना की वजह से पेश नहीं हुआ, लेकिन अदालत ने यह दलील खारिज कर जेल भेज दिया। चंदा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपना मुकदमा दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की भी अर्जी दी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया। (संवाद)
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जेई की पत्नी की जमानत अर्जी दाखिल
बांदा। बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोपी निलंबित अवर अभियंता रामभवन की जेल में बंद सह अभियुक्त पत्नी दुर्गावती की जमानत अर्जी मंगलवार को यहां पंचम अपर जिला जज की अदालत में अधिवक्ता के जरिए दाखिल की गई है। एडीजीसी रामसुफल सिंह ने पुलिस से आख्या समय से उपलब्ध कराने को कहा है। जमानत अर्जी अधिवक्ता भूरा निषाद के जरिए दाखिल हुई। उधर, सीबीआई द्वारा दिल्ली ले जाए गए रामभवन की सभी जांचे दिल्ली में सोमवार को पूरी हो गई हैं। अदालत ने उसे बुधवार तक के लिए सीबीआई को सौंपा है। बुधवार तक उसे सीबीआई वापस यहां लाकर जेल में दाखिल करेगी। (संवाद)