आपूर्ति फ्लाप हो जाने पर टैंकरों से पानी लेते उपभोक्ता।
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बांदा। आयुक्त और जिलाधिकारी समेत उच्चाधिकारियों के गांवों में सूखा राहत कामों में व्यस्त होने का फायदा चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान के अधिकारी उठा रहे हैं। इससे शहर की जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। गांवों जैसे हालात शहर में भी हो गए हैं। उधर, अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) से लेेकर अवर अभियंता तक लापरवाही पर आमादा हैं। महाप्रबंधक फोन भी नहीं उठाते।
इधर, कई वर्षों से इक्का-दुक्का इलाकों को छोड़कर शहर में पेयजल आपूर्ति संतोषजनक थी। नलकूप, इंटेकवेल और कुओं से आपूर्ति की जा रही थी लेकिन इस वर्ष हालात बदले हुए हैं। हालांकि संसाधन वहीं हैं जो पहले थे। सिर्फ अभियंता बदले हैं। शहर के इक्का-दुक्का मोहल्लों को छोड़कर कहीं भी उपभोक्ताओं को जरूरत भर का पानी नहीं मिला रहा। जल संस्थान अध्यक्ष आयुक्त एल वेंकटेश्वर लू और उपाध्यक्ष डीएम योगेश कुमार गांवों में पानी के लिए जुटे हैं।
इसका फायदा जल संस्थान अभियंता उठा रहे हैं। इसकी बानगी यह है कि अधिशासी अभियंता को यह भी नहीं पता कि शहर के किस मोहल्ले में कहां से पानी आपूर्ति किया जा रहा है। मर्दननाका, छिपटहरी, कुंजरहटी, खिन्नीनाका, आजाद नगर, गायत्री नगर, मनोहरीगंज, दीप शिखा कालोनी (इंदिरा नगर), कटरा, खाईपार आदि इलाकों में पानी की आपूर्ति नाममात्र को हो रही है। हैरत की बात यह है कि गूलर नाका स्थित जल संस्थान कार्यालय के इर्द-गिर्द भी पानी का भीषण संकट है।
मंगलवार को कई इलाकों में पानी नहीं आया। अधिशासी अभियंता सुरेशचंद्र का जवाब था कि उन्हें नहीं पता कि किस मोहल्ले में कहां से पानी आपूर्ति होता है। उन्होंने यह जानकारी जेई चौधरी से लेने की सलाह दे डाली। उधर, जेई चौधरी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नलकूपों में बिजली नहीं रही। अलग फीडर होने के बाद भी आपूर्ति न होने की बाबत जेई का कहना था कि उन्हेें अधिक जानकारी नहीं है ‘बड़े साहब’ (अधिशासी अभियंता) ही बता सकते हैं। उधर, जल संस्थान महाप्रबंधक वीएन द्विवेदी ने फोन ही नहीं रिसीव किया।