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कोर्ट की रोक के बाद भी खेत से निकाल रहे ट्रक

Mon, 02 Feb 2015 11:56 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
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राष्ट्रीय नदी (केन) पर पुल बनाकर केंद्र सरकार, वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय को खुली चुनौती दे रहे बालू कारोबारी गरीब, दलित, खेतिहर मजदूरों पर सितम ढा रहे हैं।
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दलित के खेत से जबरन बालू भरे ट्रक निकालने पर अदालत ने तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इस स्टे पर अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

बांदा सदर तहसील के पथरी खादर (थाना देहात कोतवाली) के पास केन नदी में बालू पट्टा धारक ने आरपार पुल/रास्ता बना लिया है। राष्ट्रीय केन नदी की जल धारा प्रभावित हुई है।
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इस पर वन विभाग ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम आदि का हवाला देकर कड़ी आपत्ति जताते हुए देहात कोतवाली में तहरीर दी थी लेकिन सारे विरोधों को दरकिनार कर मंडलायुक्त ने केंद्र सरकार की अनुमति के बिना राष्ट्रीय नदी पर अस्थाई पुल बनाने की अनुमति दे दी।

नतीजतर रात-दिन बक्छा घाट (हमीरपुर) मौरम खदान से जेसीबी और लिफ्टर आदि मशीनों के जरिये रात-दिन अंधाधुंध खनन हो रहा है। बालू भरे ट्रक नदी पर बनाए गए पुल से गुजर कर कई खेत रौंद रहे हैं।

पुल बनाने वाले बालू कारोबारी भूमिधरी खेतों से ट्रक निकाल रहे हैं। इस पर पथरी गांव के दलित जग्गू पुत्र मंगी ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में याचिका दायर की थी।

इसमें कहा गया था कि इसके गाटा संख्या-99 (रकबा-0.025 हेक्टेयर) और गाटा संख्या-100 (रकबा-0.245 हेक्टेयर) से जबरन बालू भरे ट्रक निकाले जा रहे हैं। सिविल जज ने 21 जनवरी को आदेश जारी करते हुए दोनों रकबों पर यथास्थिति बनाए रखने (स्टे) का आदेश जारी किया है।

सोमवार (02 फरवरी) को इस पर सुनवाई थी। जग्गू के अधिवक्ता सैय्यद अली मंजर ने बताया कि अदालत ने स्थगन आदेश 19 फरवरी तक बढ़ा दिया है।

उधर, जग्गू ने एसपी को दी अर्जी में कहा है कि अदालत से रोक के बाद भी बालू कारोबारी जबरन उसके खेत से बालू के ट्रक निकाल रहे हैं। मना करने पर भी नहीं मान रहे।
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जग्गू ने चेतावनी दी है कि अवैध पुल और उसके खेतों से ट्रकों का आवागमन नहीं रोका गया तो वह अनशन पर बैठेगा।
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