बांदा। शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी मंदिर के ट्रस्ट को लेकर लंबे अर्से से चला आ रहा प्रकरण 33 साल बाद अदालत से निपट सका। अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 20 सदस्यीय कमेटी घोषित कर दी। इसमें प्रशासनिक और पुलिस के अफसर भी शामिल हैं। नई कमेटी को अदालत ने कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए हैं।
शहर में घनी आबादी के बीच स्थित महेश्वरी देवी मंदिर में ट्रस्ट न होने पर अदालत से रिसीवर नियुक्त होते रहे हैं। ट्रस्ट को लेकर प्रकरण अदालत में विचाराधीन था। शुक्रवार को इस मामले पर अदालत से ऐतिहासिक फैसला आ गया। अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने अपने कई पृष्ठों के फैसले में श्री महेश्वरी देवी विराजमान मंदिर ट्रस्ट, बांदा कमेटी की घोषणा की और बाइलाज के लिए 28 बिंदुओं का उल्लेख किया है।
अपने आदेश में यह भी कहा है कि नई कमेटी के सभी कार्य सदैव पारदर्शी रहे। कमेटी में नगर मजिस्ट्रेट और पुलिस उपाधीक्षक भी शामिल हैं। अदालत ने कमेटी को कई शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसके पूर्व प्रतिवादियों के बीच दुरभिसंधि के चलते कई वर्षों से मंदिर की देखरेख आदि के लिए अदालत से रिसीवर नियुक्त किए गए थे। अधिवक्ता बद्री प्रसाद धुरिया और श्रीप्रकाश विश्वकर्मा रहे।
अदालत द्वारा घोषित श्री महेश्वरी देवी विराजमान मंदिर ट्रस्ट कमेटी में ये हैं शामिल
नगर मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, पूर्व प्रिंसिपल बाबूलाल गुप्त, संतोष मसुरहा, शैलेंद्र सिंह बुंदेला, राधा गुप्ता (चौक बाजार), मयंक श्रीवास्तव (बलखंडी नाका), रामनारायण गुप्ता (कटरा), मूलचंद्र अवस्थी (बन्योटा), रामजी गुप्ता, सुरेशचंद्र, संतोष कुमार, संत कुमार गुप्ता, बद्री प्रसाद धुरिया, श्रीप्रकाश, भूषणलाल साहू, मुन्नूलाल पुष्पधर, दीपक अवस्थी, जनार्दन सिंह (छावनी)।