अदालत के आदेश के बगैर अभियुक्तों के घर की कुर्की करके लगभग 10 लाख रुपये का सामान बटोर ले जाने के मामले में बबेरू कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अजीत कुमार सिंह और उप निरीक्षक वीपी सिंह अदालती कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। दोनों के विरुद्ध अदालत ने धारा 395 (डकैती) और धारा 427 के तहत कार्रवाई शुरू की है।
न्यायाधीश ने दोनों पुलिस अधिकारियों को 19 अगस्त को अदालत में तलब कर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
बबेरू निवासी चंद्रशेखर ओझा ने यहां विशेष न्यायाधीश (डकैती) की अदालत में मुकदमा दायर किया है कि इंस्पेक्टर और उप निरीक्षक तथा 14-15 सिपाही 11 अप्रैल 2012 की शाम करीब साढ़े 5 बजे उसके घर की कुर्की करके घर का 52 अदद सामान भरवाकर ले गए।
जबकि अदालत ने धारा 83 के तहत कुर्की जारी नहीं की थी। मामला यह था कि चंद्रशेखर के दोनों पुत्रों के विरुद्ध बबेरू कोतवाली में 5 मार्च 2012 को बबेरू निवासी राकेश दुबे ने कई संगीन धाराओं की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने अश्वनी को गिरफ्तार कर चालान कर दिया था तथा अशोक के विरुद्ध एसीजेएम अदालत से गैर जमानती वारंट और धारा 82 सीआरपीसी जारी की गई थी, लेकिन कुर्की की धारा 83 जारी नहीं हुई थी। इसके बाद भी इंस्पेक्टर और उप निरीक्षक ने कुर्की कर ली।
अदालत ने इंस्पेक्टर और उप निरीक्षक के विरुद्ध धारा 395 व 427 आईपीसी का मामला पाते हुए सम्मन जारी कर दोनों को 9 जुलाई 2015 को तलब किया था, लेकिन इस तिथि तक गुरुवार को दोनों पुलिस निरीक्षक अदालत नहीं आए। इस पर न्यायाधीश ने अब उन्हें एक और मौका देते हुए 19 अगस्त को तलब किया है। चंद्रशेखर की पैरवी फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता रामस्वरूप सिंह ने की।