मध्य प्रदेश की घाटियों में मानसूनी बारिश ने सूखे पड़े बांधों को लबालब कर दिया है। बांदा जनपद का गंगऊ बांध तो उफनाने लगा है। तीन दिन में इसका जलस्तर 13 फीट बढ़ गया है। बांध से रोजाना 247 क्यूसेक पानी गिर रहा है। जो अगले एक-दो दिनों में बरियारपुर बांध को भी उफना देगा। जल स्तर का इस तरह बढ़ना केन नदी में बाढ़ का खतरा है।
सीमावर्ती मध्य प्रदेश में लगातार बारिश से ‘डेड स्टोर’ की हालत में रहने वाला गंगऊ बांध उफना गया है। 7 जुलाई को बांध का जलस्तर 722 फीट था। 8 जुलाई का 733 फीट हो गया। गुरुवार (9 जुलाई) को जलस्तर बढ़कर 735.4 फीट जा पहुंचा।
बांध का पानी क्रस्टवाल लांघ गया है। इससे 247 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होकर केन नदी में गिर रहा है। यह पानी सीधे बरियारपुर आ रहा है। नतीजे में अगले एक-दो दिन में बरियापुर बांध भी लबालब हो जाएगा। अभी बरियारपुर का जल स्तर 630 फीट है। 4 फीट जलस्तर बढ़ने के बाद बरियारपुर बांध का पानी भी केन नदी में गिरने लगेगा।
तीनों बांधों में लगाए गए वायरलेस सेट
बांदा। केन नदी को पानी गंगऊ और बरियारपुर बांध से मिलता है। इन बांधों की देखरेख सिंचाई विभाग बांदा करता है। मध्य प्रदेश में हो रही बारिश और बांधों के जलस्तर में वृद्धि के मद्देनजर सिंचाई विभाग ने तीनों बांधों गंगऊ, बरियापुर और रनगवां में चौकसी बढ़ा दी है।
तीनों बांधों में वायरलेस सेट लगा दिए गए हैं। इससे हर घंटे बांधों के जलस्तर और बारिश आदि की सूचना जिला मुख्यालय को मिलती रहेगी। इसके अलावा पनगरा गांव के पास केन नहर में भी वायरलेस लगाया गया है। ताकि बांधों से डिस्चार्ज होकर केन नहर में आने वाले पानी पर नजर रखी जा सके। हालांकि सिंचाई विभाग ने तार बाबुओं की तैनाती नहीं की है। तार बाबू ही पानी का हिसाब किताब रखने में दक्ष होते हैं।