जगद्गुरु रामभद्राचार्य बुंदेलखंड के लिए खास सौगात हैं। उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान है इसलिए उन्हें ‘बहुभाषाविद’ भी कहा जाता है। उनकी शख्सियत की शोहरत न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी है।
14 जनवरी 1950 को जौनपुर के शादीखुर्द गांव में जन्मे रामभद्राचार्य दृषि्टहीन हैं। बावजूद इसके उन्हें हजारों श्लोक और चारों वेद याद हैं। उन्होंने 80 से अधिक पुस्तकें और ग्रंथ भी लिखे हैं। इसमें चार महाकाव्य हैं। अमेरिका, कनाडा आदि देशों में कथा का वाचन किया है। रामभद्राचार्य 1986 में चित्रकूट आ गए और तुलसी पीठ की स्थापना की।
1996 से विकलांगों की सेवा में जुट गए। 26 जुलाई 2001 को चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसमें इन दिनों लगभग 1250 दृष्टिबाधित, बधिर, अस्थि विकलांग शिक्षा ले रहे हैं। इनमें करीब 400 छात्राएं हैं। उन्हें खाना और छात्रावास मुफ्त है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सफाई अभियान में देश में नामित किए ‘9 रत्नों’ में रामभद्राचार्य को भी शामिल किया है। उन्हें श्रीचित्रकूट पीठाधीश्वर, महाकवि आदि भी उपाधियों से नवाजा गया है।