बांदा। चित्रकूटधाम मंडल जलसंस्थान की हालत ‘आमदनी अठन्नी और खर्च रुपया’ जैसी है। उपभोक्ताओं द्वारा पूरा बिल अदा न करने और शासन से बजट न मिलने की दोहरी मार सह रहे जल संस्थान का खजाना खाली है। कर्मचारियों को वेतन के लाले हैं। उधर, मशीनों का रखरखाव और मरम्मत नहीं हो पा रही।
जल संस्थान पर करीब 91 करोड़ की देनदारी है। जल संस्थान चित्रकूटधाम मंडल में 23 नगरीय क्षेत्रों में केन नदी, चार तालाब, 142 नलकूप, 432 कुआें, 23 ओवरहेड टैंकों, 19 सीडब्लूआर टैंक समेत 1,367 किलोमीटर लंबी पाइप लाइनों का संचालन और रखरखाव कर रहा है। मंडल के 72,863 उपभोक्ताओं को पानी मुहैया कराता है।
जल संस्थान को मंडल में वेतन, पेंशन व पाइप लाइनों के अनुरक्षण आदि के लिए करीब 25 करोड़ रुपये सालाना की जरूरत पड़ती हैं। जल कर के नाम पर मात्र 11 करोड़ राजस्व आता है। इसमे भी शत प्रतिशत वसूली भी नहीं हो पाती। हालात यह हैं कि तीन साल से शासन ने जल संस्थान को एक पैसा नहीं दिया है।
वेतन, पेंशन और पाइप लाइनों की मरम्मत के लिए पैसा नहीं हैं। तीन साल में जल संस्थान पर करीब 91 करोड़ की उधारी हो चुकी है। भुगतान न होने से ठेकेदार मशीनों व पाइप लाइन आदि की मरम्मत नहीं कर रहे। इसका सीधा असर जलापूर्ति पर पड़ रहा है।
उपभोक्ता भी नहीं दे रहे 2.86 करोड़
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में पिछले वित्तीय वर्ष में जल संस्थान को उपभोक्ताओं से 10.86 करोड़ रुपये जल मूल्य मिलना चाहिए था, लेकिन मात्र आठ करोड़ ही वसूली हुई। 2.86 करोड़ से अधिक बकाया है। बांदा में 1.4 करोड़, चित्रकूट में 81 लाख, हमीरपुर में 45 लाख और महोबा में 23 लाख रुपये उपभोक्ताओं पर बकाया है।
शासन ने तीन साल से जल संस्थान को कोई बजट नहीं दिया है। जल संस्थान की आमदनी इतनी नहीं है कि उससे वेतन व अनुरक्षण का काम हो सके। विभाग की माली स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही हैं। शासन से बजट की मांग की गई हैं।
-वीरेंद्र श्रीवास्तव, प्रभारी महाप्रबंधक, चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान, बांदा।