बांदा। महंगाई की मार ने पीएम आवासों की रफ्तार धीमी कर दी। भवन निर्माण सामग्री की कीमतें आसमान छू रही हैं। नौ साल में सीमेंट, ईंट, सरिया, बालू, गिट्टी के दामों में 40 से 50 फीसदी बढ़ गए हैं। मजदूरों और कारीगरों ने भी रेट बढ़ा दिए हैं। ऐसे में ग्रामीण लाभार्थियों को 1.20 लाख में मानक के अनुरूप आशियाना बनाना कठिन हो रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की शुरुआत वर्ष 2015-16 में हुई थी। सरकार ने उस समय वस्तुओं की कीमतों को ध्यान में रखते आवास की लागत 1.20 लाख रुपये निर्धारित की थी।
इन नौ सालों में भवन निर्माण सामग्री के दामों में भारी उछाल आया है। मकान बनवाने का सपना संजोए गरीबों का भवन निर्माण सामग्री के दाम सुनकर पसीने छूट रहे हैं। नौ साल में सरिया के दामों में दो हजार रुपये क्विंटल, सीमेंट में 150 रुपये बोरी, ईंट नंबर (एक) में प्रति हजार तीन हजार रुपये तक इजाफा हुआ है। उधर, कारीगर, बेलदार, रेजा आदि की मजदूरी में भी 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।
लाभार्थियों का कहना है भवन निर्माण की सामग्री के दाम बढ़ने से सवा लाख में एक कमरा और हाॅल तो दूर शौचालय, बाथरूम व किचेन तक बनाने को पैसा नहीं बच रहा है। इस कारण जिले में 600 से अधिक आवास अधूरे हैं।
उधर, अधिकारी निरंतर भवन बनाने का दबाव बना रहे हैं।