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केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में सोनिया गांधी भी उतरीं

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बांदा। बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की केन-बेतवा लिंक परियोजना से होने वाली तबाही के बचाव में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी भी आगे आ गई हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण एवं वनमंत्री को पत्र भेजकर केन-बेतवा लिंक के मौजूदा स्वरूप पर असहमति जताते हुए कहा कि यह पन्ना रिजर्व टाइगर को तबाह करने वाला साबित होगा। इसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी।
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पन्ना राजघराने की राजमाता सहित अनेकों संगठन पहले से ही लिंक परियोजना के विरोध में हैं। बुंदेलखंड के पन्ना (मध्यप्रदेश) में स्थित बाघों के लिए विशेष रूप से मशहूर पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा केन-बेतवा लिंक परियोजना में शामिल कर लिया गया है। यहां प्रस्तावित बांध से यह पानी में डूब जाएगा। पन्ना टाइगर के बीच से ही केन नदी निकली है। यह उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में स्थित कई इलाकों को खेत और पेट के लिए पानी का मुख्य जरिया है। पिछले माह 22 मार्च को यूपी-एमपी के मुख्यमंत्रियों के बीच परियोजना के जल बंटवारे समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद परियोजना का विरोध तेज हो गया है। कई संगठन लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं। पन्ना राजघराने की राजमाता दिलहर कुमारी भी इस लिंक परियोजना के खिलाफ खुलकर सामने आ चुकी हैं। पन्ना परिवर्तन मंच, पन्ना बचाओ आंदोलन आदि के बैनर तले लगातार विरोध हो रहे हैं।
पन्ना टाइगर को बचाने के लिए चल रहे अभियान में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपनी एंट्री दर्ज करा दी है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को दो अप्रैल को भेजे पत्र में कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना को मौजूदा स्वरूप में क्रियान्वित किया जाना ठीक नहीं है। पन्ना रिजर्व टाइगर पर इसका बहुत असर पड़ेगा। यह भी कहा कि बाघ अभ्यारण्य को जो नुकसान पहुंचेगा, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। सोनिया गांधी ने कहा कि परियोजना को मौजूदा रूप में अमल में नहीं लाया जाना चाहिए। इसे लेकर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। तमाम पर्यावरणविद इसे रोकने की मांग कर चुके हैं। सोनिया ने कहा कि बीते एक दशक में बमुश्किल पन्ना टाइगर पुनर्जीवित हुआ है। यहां लगभग 18 लाख पेड़ हैं, जो लिंक परियोजना में खत्म हो जाएंगे।
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केन परियोजनाओं के भविष्य पर खतरा
बांदा। केन-बेतवा लिंक परियोजना का बुंदेलखंड के पन्ना (मध्यप्रदेश) में विरोध लगातार जारी है। हाल ही में पन्ना परिवर्तन मंच ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ली गई तख्तियों में लिखा था कि बंद हो जाएंगी रेत खदानें, दोगुने दामों में मिलेगी रेत। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क पन्ना शहर के और नजदीक आ जाएगा। बरियारपुर डेम सहित कई केन परियोजनाओं के भविष्य पर सवाल खड़ा हो जाएगा। पन्ना टाइगर की वकालत में पर्यावरणविदों सहित मीडिया कर्मी और लेखक भी शामिल हैं। पन्ना के जर्नलिस्ट अरुण सिंह का कहना है कि पन्ना टाइगर बचाने के लिए उठ रहे स्वर मीडिया, सोशल मीडिया के साथ राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। उधर, आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि पन्ना टाइगर को लेकर केंद्र और दोनों राज्यों की सरकारों की हठधर्मी हजारों आदिवासियों और जीव-जंतुओं, पौधों आदि के लिए घातक सिद्ध होगी। (ब्यूरो)
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एक और बाघिन ने जन्में दो शावक
बांदा। एक तरफ केंद्र और दोनों राज्यों की सरकारें केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघों को बेघर करने पर आमादा हैं, तो दूसरी तरफ पन्ना टाइगर में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। कुछ अर्से पहले विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए दुर्लभ बाघ/टाइगर की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में यहां की बाघिन टी-151 ने दो शावकों को जन्म दिया है। पर्यटक गाइड मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वह पर्यटकों को घुमा रहे थे, तभी कमानी गेट से पक्का गढ़ा की तरफ अपने दो नन्हें शावकों के साथ जाती बाघिन नजर आई। यह शावक दो-ढाई माह के प्रतीत होते हैं। इसने दूसरी बार शावकों को जन्म दिया है। पिछले चार माह में पन्ना टाइगर में 15 शावकों ने जन्म दिया है। (ब्यूरो)
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