नरैनी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अनियमितताओं के आरोपों पर महानिदेशक ने जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए चार सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया है। महानिदेशक (लखनऊ) ने अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया है। समिति अपनी रिपोर्ट एक माह में शासन को सौंपेगी।
जांच के आदेश होने पर सीएमओ ने वित्तीय अधिकार दूसरे चिकित्साधिकारी को दिए हैं। नगर पंचायत नरैनी के पूर्व सदस्य रामबाबू श्रीवास ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि सीएमओ और चिकित्साधिकारियों की मिलीभगत से मृतक आश्रितों की फर्जी नियुक्ति की गई है। टीबी अस्पताल में फर्जी गाड़ियों के नाम पर तेल का भुगतान निकाला गया।
आशाओं की गलत तरीके से नियुक्ति की गई। प्रसव और नसबंदी के लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया गया। शिकायतों को गंभीरता से लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश दिए थे। इस पर स्वास्थ्य महानिदेशक (लखनऊ) डा. मेजर देवेंद्र सिंह नेगी ने अपर निदेशक (चिकित्सा एवं परिवार कल्याण, झांसी) को पत्र भेजकर कहा कि जांच के लिए निदेशक (सीएचसी) की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की गई है।
समिति में संयुक्त निदेशक (पीएचसी) डा. जावेद अहमद, सहायक लेखाधिकारी अखिलेश कुमार राय व वरिष्ठ संप्रेक्षक सुशीलचंद्र श्रीवास्तव सदस्य होंगे। समिति अपनी जांच रिपोर्ट एक माह के अंदर शासन को सौंपेंगी। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एनडी शर्मा ने जारी आदेश में कहा कि नरैनी सीएचसी अधीक्षक डा. बीएस राजपूत (बाल रोग विशेषज्ञ) सिर्फ सामान्य एवं प्रशासनिक कार्य देखेंगे।
चिकित्साधिकारी डा. देव तिवारी पूर्व की भांति वित्तीय कार्य संपादित करेंगे। माना जा रहा कि महानिदेशक द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद वित्तीय और प्रशासनिक कार्य अलग-अलग चिकित्साधिकारियों को सौंपे गए हैं।