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आयोग ने अनुसूचित जाति के परिवार के उत्पीड़न का लिया संज्ञान

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बांदा। जमीन के विवाद में अनुसूचित जाति की बालिका और उसके परिवार के साथ राइफल के बल पर की गई मारपीट, धौंस धमकी और बालिका के भाई को थाने में बैठा लेने को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने गंभीरता से लिया है। यहां के डीएम और एसपी को पत्र जारी कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करते हुए 15 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है।
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बबेरू कोतवाली के परसौली गांव की रेशमा पुत्री रामकुमार ने आयोग को भेजी अर्जी में बताया था कि जमीन की रंजिश में 17 जून को वह अपने परिजनों के साथ मिलाथू गांव जा रही थी। रास्ते में गांव के दबंगों ने गालियां देते हुए धारदार हथियार और डंडों से हमला कर दिया।
उसे, मां, भाई तथा मामा को गंभीर चोटें आईं। 30 हजार रुपये भी छीन लिए। शिकायत पर बबेरू कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और उल्टा उसे थाने में बैठा लिया। कुछ ही देर बाद उसका भाई अजय कोतवाली आ गया तो उसे पुलिस कर्मियों ने पीटा और थाने में बैठा लिया। अब तक नहीं छोड़ा है। 20 जून को एसपी को अर्जी दी गई। फिर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सहायक निदेशक ने मंगलवार (23 जून) को बांदा डीएम और एसपी को जारी पत्र में रेशमा की अर्जी का हवाला देकर कहा कि इस मामले को आयोग ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। आयोग ने कहा है कि राजस्व अधिकारी/पुलिस क्षेत्राधिकारी से इसकी निष्पक्ष जांच कराएं।
दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करके पीड़ित पक्ष को उत्पीड़न से मुक्ति दिलाएं और विधिक संरक्षण दें। आयोग ने कहा है कि जांच के बाद इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत आख्या और इस पर की गई कार्रवाई आयोग को 15 दिन के अंदर भेजें। आयोग ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि समय के भीतर उत्तर/कार्रवाई न होने पर आयोग अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करने को बाध्य होगा।
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