कोडीनयुक्त सिरप का मामला
-अतर्रा को बनाया था नशे के कारोबार का सेंटर
-मेडिकल स्टोरों से लेकर मध्यप्रदेश तक होती थी सप्लाई
अमर उजाला ब्यूरो बांदा। कोडीनयुक्त सिरप को नशे के कारोबार में खपाने के लिए अतर्रा को सेंटर बनाया गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि बाहर से मंगाई जाने वाली सिरप की खेप अतर्रा के एक कोल्ड स्टोरेज में रखी जाती थी। यहीं डिमांड के अनुसार सिरप के रैपर बदलने का काम भी होता था। इसके बाद मेडिकल स्टोरों के अलावा मध्यप्रदेश के कई स्थानों पर इसकी आपूर्ति की जाती थी।
एसपी पलाश बंसल ने बताया कि कंपनी से करीब 65 रुपये में खरीदी गई सिरप को अन्य खर्च जोड़कर करीब 70 से 75 रुपये में अतर्रा तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद इसे करीब 100 से 105 रुपये में आगे बेचा जाता था। सिरप की एमआरपी 200 रुपये से अधिक थी। इसके चलते खरीदार से मांग और सौदे के अनुसार मनमानी कीमत वसूली जाती थी।
जांच में सामने आया कि कुछ लोग बिना रैपर या बदले हुए रैपर वाली सिरप की मांग करते थे। ऐसे लोगों के लिए कोल्ड स्टोरेज में रैपर बदल दिए जाते थे। रैपर बदलने का खर्च भी सिरप की कीमत में जोड़ दिया जाता था। इस तरह कंपनी से खरीदी गई दवा को नशे के कारोबार में खपाने के लिए अलग-अलग माध्यमों से बाजार तक पहुंचाया जा रहा था।
जिले के साथ आसपास भी एसटीएफ कर रही रेकी
एसटीएफ प्रयागराज और बांदा पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियां खंगाल रही हैं। जिले के साथ आसपास के जिलों में भी संदिग्ध लोगों और ठिकानों की रेकी की जा रही है। पुलिस को सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य लोगों की तलाश है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आने वाले नामों और साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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30 हजार शीशियों की खेप पकड़ी, अब तक पांच गिरफ्तार
बिसंडा क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास एसटीएफ प्रयागराज और पुलिस ने तीन सितंबर को ट्रक से कोडीनयुक्त सिरप की बड़ी खेप पकड़ी थी। ट्रक से करीब 30 हजार शीशियां बरामद हुई थीं। मामले में चार आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान मुख्य आरोपी अतर्रा निवासी प्रियांशु उर्फ किशन की भूमिका सामने आई। उसे आगरा से गिरफ्तार किया गया। इस तरह मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।