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Banda News: मेडिकल फर्म के कारोबार का 90 फीसदी हिस्सा कोडीन सिरप का

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बांदा। कोडीनयुक्त सिरप तस्करी के मामले की जांच में पुलिस के हाथ बड़ा तथ्य लगा है।
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प्रियांशु, प्रवीण और रोहित के नाम पर संचालित मेडिकल फर्म में होने वाले कुल कारोबार का करीब 90 फीसदी हिस्सा केवल कोडीनयुक्त सिरप का था। पुलिस को यह जानकारी फर्म की बिलिंग की जांच में मिली है। इससे साफ हुआ है कि फर्म के जरिये बड़े पैमाने पर कोडीनयुक्त सिरप की खरीद-बिक्री की जा रही थी।
जांच में सामने आया है कि कोडीनयुक्त सिरप का यह कारोबार केवल बांदा या बुंदेलखंड तक सीमित नहीं था। नेटवर्क बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों के साथ मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक फैला होने की जानकारी मिली है।
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इन क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों तक सिरप की आपूर्ति किए जाने के बिंदु पर पुलिस पड़ताल कर रही है। बिलिंग में सिरप के कारोबार का इतना बड़ा हिस्सा सामने आने के बाद पुलिस अब फर्म के पुराने खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है।
कोडीनयुक्त सिरप तस्करी मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन, प्रवीण उर्फ लकी और रोहित पांडेय को छह घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में तीनों से मिली जानकारी के आधार पर पांच नए नाम सामने आए हैं। पुलिस अब इन पांचों की भूमिका, आरोपियों से संपर्क और सिरप की खरीद-बिक्री में उनकी संभावित भूमिका की जांच करेगी।
रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपियों से सिरप की खरीद, आपूर्ति, भुगतान और उसे खपाने के ठिकानों के संबंध में पूछताछ की। पांच नए नाम सामने आने के बाद पुलिस इनके मोबाइल संपर्क, लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करेगी। पुलिस का प्रयास है कि आरोपियों के बयानों का स्वतंत्र साक्ष्यों से सत्यापन कर नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट की जा सके।
एसटीएफ और थाना बिसंडा पुलिस ने तीन सितंबर को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास एक डीसीएम से कोडीनयुक्त सिरप की बड़ी खेप पकड़ी थी। डीसीएम में 250 पेटियों में करीब 30 हजार शीशी सिरप बरामद हुई थी। इसकी कीमत करीब तीन करोड़ रुपये बताई गई थी। पुलिस ने डीसीएम और कार समेत आरोपियों को पकड़ा था।
मामले में अब तक छह आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया था कि सिरप की खेप हमीरपुर की ओम मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस के जरिये आई थी।
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बिलिंग से खुली कारोबार की असली तस्वीर
पुलिस अब मेडिकल फर्म की बिलिंग को जांच का अहम आधार मान रही है। फर्म के कुल कारोबार में करीब 90 फीसदी हिस्सा कोडीनयुक्त सिरप का होना इस बात की जांच का प्रमुख बिंदु है कि इतनी बड़ी मात्रा में सिरप किन-किन फर्मों और मेडिकल स्टोरों को बेचा गया। पुलिस खरीद और बिक्री की बिलिंग का मिलान कर आपूर्ति की पूरी कड़ी तलाश रही है। जांच में जिन पांच नए नामों का पता चला है, उन्हें भी इसी नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।
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