बांदा। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने लोकायुक्त की
नियुक्त में देरी का ठीकरा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर फोड़ा। उन्होंने कहा
कि प्रक्रिया में मुख्यमंत्री ने छह माह लगा दिए।
मुख्यमंत्री
पूरी जिम्मेदारी निभाते तो सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना
पड़ता। लोकायुक्त की नियुक्ति का जो अधिनियम है, उसके विपरीत नियुक्ति में
देरी की गई। राज्यपाल शनिवार को यहां कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत
समारोह में शामिल होने आए थे।
मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में श्री
नाईक ने कहा कि लोकायुक्त का मामला जनता से जुड़ा है। लोकायुक्त की
नियुक्ति की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और
प्रदेश के नेता विपक्ष की होती है।
लोकायुक्त का नाम यही तीनों तय
करते हैं। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी की कोर्ट में
पेशी के बाबत राजनीतिक मुद्दा बताकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
इससे
पूर्व दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कृषि विश्वविद्यालय के सात मेधावी
छात्रों को मेडल पहनाए और उपाधियां सौंपी। इनमें चार उद्यान और तीन कृषि
विषय के छात्र शामिल हैं।
राज्यपाल ने छात्रों से कहा कि किताबी
पढ़ाई पूरी करने के बाद गांवों में किसानों को अपनी शिक्षा का भरपूर लाभ
दें। किसानों को आगे बढ़ाएं। तभी उनकी इस शिक्षा का उद्देश्य देश के लिए
हितकारी होगा।
दीक्षांत समारोह में भारत सरकार में कृषि अनुसंधान
एवं शिक्षा विभाग सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद महानिदेशक डा. एस
अय्यप्पन मुख्य अतिथि रहे।
उन्होंने बढ़ते तापमान पर चिंता जताई। विश्वविद्यालय कुलपति डा. एसएल गोस्वामी ने राज्यपाल और महानिदेशक की अगुवानी की।
सांसद
भैरो प्रसाद मिश्र और राज्यसभा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद, विश्वविद्यालय
के पूर्व कुलपति डा. एमएस औलख, मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर लू, डीआईजी
ज्ञानेश्वर तिवारी, जेएन डिग्री कालेज प्राचार्य डा. नंदलाल शुक्ल, डीएम
सुरेश कुमार, एसपी आरपी पांडेय, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन उपस्थित रहे।