बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के एकलौते राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में तैयार 110 बेड के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) में बच्चों के लिए मनोरंजन के भी साधन होंगे।
झूले, खिलौने समेत दीवारों पर कार्टून पोस्टर आदि की व्यवस्था रहेगी, जिससे बच्चों को अस्पताल के माहौल का अहसास न हो और खिलौने से उनका मन लग सके। हालांकि, शासन ने अभी इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं दिया है।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की संभावनाओं के मद्देनजर शासन इससे निपटने की हर तैयारी में जुटा है। खासकर पांच वर्ष तक उम्र के बच्चों को ध्यान में रखकर ज्यादा व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों के अलावा अन्य विभागों के डाक्टरों को भी प्रशिक्षित कर इसके लिए तैयार किया जा रहा है। इन्हीं तैयारियों के बीच बनाए गए पीकू वार्डों में क्रैच सुविधा पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे वार्ड में भर्ती बच्चे परेशान न हो सकें।
पीकू वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चों के लिए विभिन्न रंग-बिरंगे खिलौनों की व्यवस्था रहेगी। उन्हें ओढ़ने के लिए कार्टून चित्र वाले चादर उपलब्ध कराए जाएंगे। दीवारों पर भी कार्टून बनेंगे। इसके अलावा बच्चों के मन को खुश रखने वाले भी चित्र बनाए जाएंगे।
मेडिकल कॉलेज में इसकी तैयारियां शुरू हो गईं हैं। प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त कोई बजट नहीं मिला है। अन्य मदों की राशि से वार्ड में इसकी व्यवस्थाएं की जाएंगी। (संवाद)
पीकू वार्ड की तैयारी पर मॉकड्रिल आज
पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट वार्ड की तैयारियों को लेकर शुक्रवार (27 अगस्त) को मेडिकल कॉलेज में मॉक ड्रिक होगी। शासन से नामित नोडल अधिकारी/संयुक्त निदेशक (मेंटल हेल्थ, लखनऊ) डा. सुनील पांडेय भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि पीकू वार्ड की तैयारियों के संबंध में मॉकड्रिल किया जाना है। नोडल अधिकारियों को शासन से कुछ बिंदु दिए गए हैं। उन्हीं बिंदुओं पर तैयारी परखी जाएगी, फिर जो कमियां होंगी उसे तुरंत दूर किया जाएगा।
केयर यूनिट के लिए 39 नए मॉनीटर मिले
पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट के लिए 39 नए मॉनीटर शासन से मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराए गए हैं। अब इनकी संख्या बढ़कर 108 हो गई, जबकि वार्ड में 110 बेड हैं। लखनऊ से आए इंजीनियर बृहस्पतिवार को वेंटिलेटर से जोड़कर मॉनीटर एंस्टाल करने में लगे रहे।
प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि मॉनीटर की मदद से बच्चों की सेहत पर स्टाफ दूर से नजर रख सकेगा। इससे बच्चे भी नहीं घबराएंगे।
दूसरे विभागों के डाक्टर चलाएंगे वेंटिलेटर
कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए 20 बेड पर एक डाक्टर का मानक निर्धारित किया गया है। 110 बेड के पीकू वार्ड के लिए एक शिफ्ट में कम से कम पांच डाक्टर की जरूरत होगी।
यानी 8-8 घंटे की तीन शिफ्टों में कुल 15 डाक्टर होने चाहिए, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों का टोटा होने से यह मानक धड़ाम है। प्रधानाचार्य का कहना है कि दूसरे विभागों के विशेषज्ञों को इसके लिए तैयार किया गया है।
राज्य स्तर के अलावा स्थानीय स्तर पर भी डाक्टरों को बच्चों के वेंटिलेटर संचालन और बॉटल/इंजेक्शन के लिए आसानी से उनकी नस ढूंढने का प्रशिक्षण दिया गया है। रोजाना इसकी प्रैक्टिस भी कराई जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में मौजूदा में मात्र चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। एक और डाक्टर की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
बच्चों की सुरक्षा को कॉलेज प्रशासन परेशान
कोरोना संक्रमित भर्ती होने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन परेशान है। संक्रमित बच्चों को वार्डों में अलग रखा जाएगा। उनके घर का सदस्य साथ में नहीं होगा। ऐसे में छोटे बच्चों की चोरी जैसी घटना न हो सके इसके लिए प्रशासन सुरक्षा बंदोबस्त में जुटा है।
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलिंडर, पल्स ऑक्सीमीटर और अभी हाल ही में तीन मंजिलों की कीमती टोटियां व पाइप लाइन चोरी हो गईं। अब तक इसका खुलासा नहीं हुआ। ऐसे में बच्चा चोरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस बाबत प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव का कहना है कि फिलहाल ऐसी घटना नहीं हो सकेगी। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। फिर भी मेडिकल कॉलेज कैंपस की सुरक्षा के लिए उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजा है। सुरक्षाकर्मी नियुक्त होने के बाद अराजकतत्वों पर लगाम लग जाएगी। चोरी घटनाएं भी नहीं हो सकेंगी।