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बाल कवियों ने रचनाओं से मन मोहा

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काव्य कला दिवस में अपनी कविता पेश करता उत्कर्ष। - फोटो : BANDA
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बांदा। कविता सिर्फ वयस्कों और बुजुर्गों का शौक नहीं। बाल कवि भी इसमें महारत रखते हैं। इसकी बानगी रविवार को शाम जिला पंचायत सभागार में आयोजित काव्य कला दिवस के मंच पर नजर आई।
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किशोर उम्र बालक-बालिकाओं ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। इस अवसर पर मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी पर आधारित टेलीफिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में 10 वर्ष से 67 वर्ष तक के कवि और शायर शरीक हुए।
बुजुर्ग कवि नाथूराम लश्करी ने सरस्वती पूजन से कार्यक्रम की शुरुआत की। मंजरी प्रिया ने वंदना की। बालक-बालिकाओं ने मिर्जा गालिब, रवींद्रनाथ टैगोर और देश के कई अन्य मशहूर कवियों और शायरों की रचनाएं उन्हीं के अंदाज में पढ़ीं।
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बालिका आरती तिवारी, अंशिका मिश्रा, वेदिका गुप्ता, वैष्णवी विश्वकर्मा और बालक कार्तिकराज, हिमांशू गुप्ता, मानवेंद्र प्रताप गुप्ता, तनवीर, सुखराज, उत्कर्ष, नवनीत, प्रकाश सविता, शुभि ने कवियों और शायरों की रचनाएं पेश कीं।
राजेश तिवारी रंजन, रीता गुप्ता, असगर बांदवी, दयानंद, प्रकाश नारायण विनीत, भावना जैन, आरिफ आदि ने निर्धारित 10 शब्दों में से किसी एक पर कविता पढ़ी। उत्कर्ष ने आरएल इंस्टीवेंशन और रवींद्रनाथ टैगोर की अंग्रेजी कविताओं का पाठ किया।
शायर/कवि डा. खालिद इजहार, नवनीत सेन, शिफा, लवकुश सिंह, वैष्णवी, बेबी कुशवाहा, अंशिका आदि ने मिर्जा गालिब और श्याम नारायण पांडेय, सुभद्रा कुमारी चौहान, सुमित्रानंदन पंत की कविताएं भी गूंजीं। संजय श्रीवास्तव धर्मेश्वर संस्था द्वारा निर्देशित टेलीफिल्म का प्रदर्शन किया।
इसमें मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी के शेर प्रस्तुत किए गए हैं। आशा सिन्हा, ओमप्रकाश मसुरहा आदि ने प्रतिभागी बालक-बालिकाओं को पुरस्कृत किया। इस मौके पर पीयूष, संत कुमार गुप्ता, आनंद मिश्रा, तनु श्रीवास्तव सहित शेखर शर्मा, दीपक गुप्ता, रामनरेश कुशवाहा, मनोज पुरवार, ओमनारायण विदित, अशोक त्रिपाठी जीतू, अवधेश सिंह, मुमताज अली, बृजकिशोर आदि मौजूद रहे। संजय श्रीवास्तव ने सभी का आभार जताया।
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