पुल बनाने में आई लागत का पांच गुना ज्यादा वसूल लेने
के बाद भी टोल टैक्स की वसूली जारी है। केंद्र सरकार ने भले टोल टैक्स
खत्म करने का आदेश दिया हो लेकिन यह यहां बेअसर है।
पीडल्ब्यूडी और
ठेकेदार का कहना है कि 31 मार्च तक उनका ठेका है। तब तक वह वसूली करते
रहेंगे। टोल टैक्स खत्म करने संबंधी कोई आदेश मिलने से उन्होंने इनकार किया
है।
बांदा शहर के पश्चिम छोर में नेशनल हाइवे-76
(झांसी-मिर्जापुर) के किलोमीटर 211 में केन नदी पर पक्का सड़क पुल बना हुआ
है। यह 1980 में बना था। तब से इसमें लगातार पीडल्ब्यूडी टोल टैक्स वसूल
रही है।
पुल बनाने में कुल लागत करीब एक करोड़ 56 लाख रुपये आई थी।
हर साल टोल टैक्स वसूली का ठेका देकर पीडल्ब्यूडी अब तक इस पुल से आठ
करोड़ 57 लाख 66 हजार रुपये से ज्यादा वसूल चुकी है, लेकिन टोल टैक्स
वसूलना नहीं खत्म हुआ।
हालांकि नियम यह है कि पुल निर्माण में आई
लागत वसूल होने के बाद टोल टैक्स फ्री कर दिया जाता है। उधर, केंद्र सरकार
ने पिछले माह 13 पुलों को टोल मुक्त कर दिया था। इनमें बांदा केन नदी पर
बना पुल भी शामिल है, लेकिन ठेकेदार का बैरियर ज्यों का त्यों बरकरार है और
रात-दिन टोल टैक्स वसूली की जा रही है।
पिछले साल पुल टोल टैक्स
वसूली का ठेका एक करोड़ में हुआ था जबकि शुरुआती दौर 1981-82 में मात्र दो
लाख 35 हजार रुपये का ठेका हुआ था।
पीडल्ब्यूडी अधिशासी अभियंता
एसएस निरंजन ने बताया कि टोल टैक्स वसूली का ठेका 31 मार्च 2015 तक के लिए
है। पहली अप्रैल से शायद टोल टैक्स की वसूली बंद हो जाए।
बैरियर पर
काम कर रहे ठेकेदार के कर्मचारियों ने बताया कि यहां से रोजाना लगभग 600
चार पहिया हल्के वाहन गुजरते हैं। इनसे पांच रुपये प्रति टोल टैक्स वसूला
जाता है।
रोजाना लगभग 400 से 500 ट्रकों का आवागमन होता है।
प्रत्येक ट्रक से 15 रुपये टोल टैक्स वसूला जाता है। पीडल्ब्यूडी और बैरियर
कर्मियों का कहना है कि टोल टैक्स न वसूले जाने संबंधी उन्हें कोई आदेश
नहीं प्राप्त हुआ है।