महिला जागरूकता शिविर में उपस्थित महिलाएं।
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भारतीय संविधान मेें सभी को समान अधिकार हासिल होने के बावजूद राजनैतिक और सामाजिक आदि क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बराबर नहीं है। महिलाओं के प्रति नजरिया बदलना होगा और सोच बदलने के लिए शिक्षा जरूरी है। यह बात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ.सज्जाद हसन ने कही।
बुधवार शाम नरैनी क्षेत्र के पिछड़े गांव नहरी में विद्याधाम समिति के महिला जागरूकता शिविर में हसन ने कहा कि देखा जाता है कि महिलाएं विकास की मुख्य धारा में शामिल नहीं हो पातीं। जबकि महिला परिवार की प्रथम इकाई है। उसके बिना परिवार का विकास होना नामुमकिन है। तमाम महिलाओं ने अपने अनुभव और आपबीती बयां की। महराजपुर की सुदामा ने कहा कि मनरेगा में महिलाओं को काम देने में यह सोचकर कन्नी काटी जाती है कि वह ज्यादा मेहनत नहीं कर पातीं।
बड़ैछा गांव की मुन्नी विश्वकर्मा ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व उसके बीमार पति की इलाज के अभाव में मृत्यु हो गई थी। नाबालिग बच्चों के भरण पोषण की अब उसी पर जिम्मेदारी है। बैंक और साहूकारों का कर्ज है। मनरेगा में काम नहीं मिल रहा। न ही कोई सरकारी मदद मिल रही है। नहरी गांव की ममता ने आवास आवंटन में अवैध वसूले गए 3000 रुपये की जानकारी दी।
मेजबान विद्याधाम समिति की कार्यकर्ता माया श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं आज भी घर की चहारदीवारी में जीवन बसर कर रही हैं। परिवार में ही उनके साथ भेदभाव होता है। इसके लिए सोच मेें परिवर्तन लाना जरूरी है। समिति की परियोजना समन्वयक गुंजन गुप्ता ने महिलाओं के हक बताए। समाजसेवी राजाभइया ने कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों के लिए जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्याधाम समिति अन्य गांवों में ऐसे महिला जागरूकता शिविर लगाएगी। शिविर मे हर्षिता, शिव कुमार गर्ग, माया सोनी, नाजिनी, नेहा यादव ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन ठकू पुजारी ने किया। प्रदीप गर्ग, लक्ष्मण कुमार, छेदीलाल, गुड़िया, नासिर अली, बृजमोहन यादव आदि शामिल रहे।