मकर संक्रांति पर केन नदी में स्नान को आए परिवार ने मौजमस्ती भी की।
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मकर संक्रांति सोमवार को दूसरे दिन पुण्य काल के रूप में मनाई गई। केन नदी सहित जिले के तालाबों और सरोवरों तथा ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद खिचड़ी दान करने की धार्मिक परंपरा संपन्न की।
मकर संक्रांति 14 जनवरी (रविवार) को भी मनाई गई थी। स्नान की परंपरा सोमवार को ज्यादा निभाई गई। मान्यता है कि इस दिन जप, तप, दान, स्नान और श्राद्ध करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी श्रद्धा और मान्यता से सराबोर श्रद्धालुओं ने नदी और सरोवरों में डुबकी लगाई।
जगह-जगह खिचड़ी दान की। मंडल मुख्यालय स्थित केन नदी के घाटों पर पूरा दिन श्रद्धालुओं का रेला और मेला रहा। बच्चों, किशोरों, युवक और युवतियों ने नदी के पानी में मौज-मस्ती का धमाल भी किया। उधर, ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में दूसरे दिन भी ग्रामीण क्षेत्रों और सीमावर्ती मध्य प्रदेश के गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं का जमघट रहा।
दुर्ग के ऐतिहासिक तालाबों में स्नान किया। दोनों दिन युवाओं ने पतंग उड़ाकर भी संक्रांति मनाई। धर्माचार्यों ने बताया कि 70 वर्षों बाद अबकी ऐसी मकर संक्रांति है जो पारिजात योग में है। सोमवार को 15 जनवरी को पुण्य काल माना गया।