सीडीओ साहब को अपनी ‘गोद’ की याद आ ही गई। हां, यह हुआ तब, जब खबर छपी। मुख्य विकास अधिकारी सोमवार को अपने गोद लिए गांव पुकारी पहुंच गए। मायूस किसानों ने शिकवा किया कि-‘हुजूर, आते-आते बहुत देर कर दी’। तो सफाई दी कि आने में देर क्यों हुई । अपने साथ लाए अफसरों से कहा कि गांव को गोद उन्होंने लिया है इसलिए अब गांव के किसी भी ग्रामीण की गोद सरकारी योजना के लाभ से सूनी न रह जाए।
नरैनी क्षेत्र के पुकारी गांव को सीडीओ ने गोद ले रखा है। लेकिन 6 माह से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी वह इस गांव में नहीं आए। ओला-बारिश से कराह रहे किसानों की भी सुध नहीं ली। ‘अमर उजाला’ ने 13 अप्रैल मंगलवार को ‘गांव गोद लिया और रामभरोसे छोड़ दिया’ शीर्षक से खबर छापी।
सीडीओ राममणि त्रिपाठी मंगलवार की शाम को ही गांव पहुंच गए। किसानों से रूबरू हुए और उनकी फरियादें सुनीं। किसानों को अपना मोबाइल फोन नंबर देते हुए कहा कि राहत राशि हासिल करने में कोई परेशानी आए तो उन्हें बताएं। गांव के स्कूल में ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर समस्याएं सुनीं।
कुपोषण की शिकार नत्थू की बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एएनएम को निर्देश दिए। सीडीपीओ से पोषाहार वितरण की जानकारी ली। किसान सत्यनारायण यादव, मिजाजीलाल, तुलसीदास पांडेय, धनीराम, नर्वदा प्रसाद, जफर अली, नीलकंठ तिवारी और नत्थूराम आदि ने सीडीओ को गांव की बदहाली से रूबरू कराया।
कुछ किसानों ने यह भी कहा कि-‘हुजूर, आते-आते बहुत देर कर दी’। सीडीओ के साथ जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी आरडी यादव, बीडीओ रामकिशुन, सीडीपीओ, ग्राम विकास अधिकारी प्रीतम सिंह आदि भी थे। सीडीओ ने इन सभी को निर्देश दिया कि किसानों को मानक के मुताबिक राहत राशि और मुआवजा दिया जाए। विकास के अन्य कार्यों को भी तेजी से कराने को कहा। ग्राम प्रधान गिलियां ने गांव की अन्य समस्याओं से सीडीओ को वाकिफ कराया।