हाईकोर्ट के आदेश पर मनरेगा कार्यों की हो रही सीबीआई
जांच में अब सीबीआई ने लगभग सभी उन विभागों को जांच के दायरे में ले लिया
है, जहां मनरेगा से काम कराए गए हैं।
वन विभाग के अभिलेख खंगालने
और कब्जे में लेने के बाद अन्य विभागों से भी सीबीआई ने मनरेगा कार्यों
संबंधी अभिलेख तलब किए हैं। इन्हें सात जनवरी तक सीबीआई को सौंपना होगा।
बुंदेलखंड
के सात जनपदों में मनरेगा से 32 अरब 62 करोड़ रुपये के काम हुए हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में 16 अरब 81 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इसमें
बांदा जनपद में 5 अरब 14 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों ने मनरेगा से खर्च
किया है। चित्रकूट में 3.82 अरब, महोबा में 2.49 अरब और सबसे ज्यादा 5.36
अरब हमीरपुर में खर्च हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर हाल ही में सीबीआई ने
मनरेगा कार्यों की जांच शुरू की है।
सीबीआई टीम ने पहले चरण की
जांच में वन विभाग की जांच पड़ताल की थी, क्योंकि मनरेगा से काफी भारी-भरकम
बजट वन विभाग ने खर्च किया है। इसके अलावा विकास भवन से और भी कुछ विभागों
के अभिलेख और आंकड़े हासिल किए थे।
अब सीबीआई ने अपनी जांच का
दायरा बढ़ा दिया है। अब हर विभाग से मनरेगा संबंधी कामों की जांच कर रही
है। सीबीआई ने सभी विभागों से सात जनवरी तक अभिलेख तलब किए हैं। मनरेगा सेल
सभी विभागों से यह अभिलेख जुटा रहा है।
अगले दो दिनों में सारे
अभिलेख लखनऊ स्थित सीबीआई मुख्यालय को सौंप दिए जाएंगे। सीबीआई वर्ष 2007
से वर्ष 2010 के दौरान मनरेगा से कराए गए कार्यों की जांच कर रही है। पहले
चरण में सीबीआई ने विभिन्न विभागों को कन्वर्जेस के अंतर्गत दिए गए पैसे की
जानकारी हासिल की थी।
सीबीआई टीम ने कुछ स्थानों पर मनरेगा
कार्यों का मौका-मुआयना किया था। सबसे ज्यादा काम वन, सिंचाई, भूमि
संरक्षण, पीडब्ल्यूडी, उद्यान, पशुपालन आदि विभागों ने मनरेगा से कराए हैं।
सीबीआई के इस रुख से विभागों में हड़कंप मचा है।