बांदा। प्रयागराज और लखनऊ को छोड़कर अन्य महानगरों के लिए एसी बसें न होने से यात्रियों को तपती भट्ठी बनीं बसों में यात्रा करनी पड़ रही है। पसीना बहाते यात्री हाथ से पंखा कर रहे हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में कुल 394 बसों का बेड़ा है। इसमें सिर्फ दो बसें ही वातानुकूलित हैं। जिन्हें फतेहपुर से लखनऊ चलाया जा रहा है। इसके अलावा अवध डिपो की दो बसें शाम के समय बांदा से फतेहपुर होकर लखनऊ जाती हैं। वहीं, सुबह के समय जीरो डिपो की दो बसें प्रयागराज से बांदा के लिए चलती हैं। दोपहर के समय कोई एसी बस नहीं है।
सफर लंबा होने से यात्री बीमार हो रहे हैं। बच्चों को बुरा हाल है। यात्रियों को कहना है कि नान एसी बसों में कोई सुविधा नहीं है। बसें आग की तरह तपती हैं। यात्रियों के बीमार होने पर प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं है। खिड़कियों के शीशे तक टूटे हैं।
इन शहरों के लिए नहीं एसी बसें
दिल्ली, रायबरेली, अजमेर, कानपुर आदि महानगरों के लिए वातानुकूलित बसें न होने से यात्रियों को दिक्कतें हो रही हैं।
गर्मी के कारण बस आग की तरह तपती है। कई बसों की खिड़कियां व दरवाजों के शीशे टूटे होने से सीधे लपट लगती है। बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। - अंजू द्विवेदी (यात्री)
कानपुर के लिए एसी बस नहीं है। मजबूरी में सामान्य बस में यात्रा करनी पड़ रही है। परिचालक बस स्टैंड पर घंटों बस खड़ी रखते हैं। यहां ठंडा पानी भी नहीं है। - द्वारिका यादव।(यात्री)
वर्जन
शासन को मंडल के लिए 100 बसों का प्रस्ताव भेजा गया है। इनमें एसी व इलेक्ट्रिक बसें भी मांगी गई हैं। उम्मीद है कि जून के आखिरी सप्ताह तक कई बसें उपलब्ध हो जाएंगी।
- अशोक कुमार अग्रवाल
क्षेत्रीय प्रबंधक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा