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बुंदेलखंड में लगेंगे 1000 दलहन प्रोसेसिंग प्लांट

Thu, 09 Jun 2016 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बुंदेलखंड - फोटो : बीबीसी
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बांदा। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड को दलहन और तिलहन का हब बनाने की कवायद चल रही है। सरकार की मंशा 2018 तक बुंदेलखंड को दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बना विदेशों को निर्यात करने की है। इसके लिए सरकार पूरे बुंदेलखंड एक हजार प्लांट लगाएगी। यह जानकारी प्रदेश के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में दी।
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 कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित खरीफ गोष्ठी में शामिल होने आए प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि बुंदेलखंड में अलसी, सरसों, तिल, अरहर, मूंगफली, मटर की असीम संभावनाएं हैं। ये यहां की मुख्य फसल भी हैं। कई साल से दैवी आपदा की मार से दलहन और तिलहन की फसल बर्बाद हो रही है।

साथ ही प्रोसेसिंग प्लांट न होने से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसान ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। बताया कि सरकार की योजना बुंदेलखंड के सातों जिलों में एक हजार प्रोसेसिंग प्लांट खोलने की है।
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जब यहां कदम-कदम पर दलहन और तिलहन प्रोसेसिंग प्लांट लग जाएंगे तो स्थितियां बदल जाएंगी। किसान दलहन उत्पादन में रुचि लेंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव देश के प्रमुख उद्यमियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। कई उद्यमियों से बातचीत हुई है। ये बुंदेलखंड में दलहन और तिलहन प्रोसेसिंग प्लांट लगाने को तैयार हैं। वर्ष 2018 तक बुंदेलखंड की दाल विदेशों में भी निर्यात होने लगेगी। दो से तीन माह में प्लांट लगाने का काम शुरू हो जाएगा।

प्रमुख सचिव ने बताया कि इस साल सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना है। ऐसे में किसान अरहर और तिल की ज्यादा से ज्यादा खेती करें। उम्मीद है कि इसी साल की उपज उन्हें प्रोसेसिंग प्लांट में बेचने का अवसर मिल जाए। जब प्लांट लग जाएंगे तो किसानों को उपज लेकर मंडी नहीं जाना पड़ेगा। उद्यमी खुद उनके खेत में जाकर अरहर और तिल खरीदेंगे। बताया कि बुंदेलखंड के किसानों को खेत-तालाब के साथ स्प्रिंकलर सेट और पंपसेट देने की भी शासन की योजना है ताकि वे अपने तालाब से अपने संसाधन के जरिये खेतों की सिंचाई कर बेहतर उत्पादन कर सकें।
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