विशंभर निषाद, जीसी दिनकर, दलजीत सिंह।
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बांदा। ‘बड़ा शोर सुनते थे सीने में दिल का, जो चीरा तो एक बूंद खून निकला’। प्रधानमंत्री की बुंदेलखंड आमद के बाद यही शेर लोगों की जुबां पर है। बुंदेलखंड के लोगों को शिकवा-गिला और विपक्ष को मुद्दा मिला। विपक्ष अब प्रधानमंत्री पर बुंदेलखंड को छलने का आरोप लगाते हुए हमलावर हो गया है।
प्रधानमंत्री द्वारा बुंदेलखंड के लिए कोई भी स्पष्ट घोषणा न करने पर बुंदेलखंड के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को माहौल गरमा उठा है। खासतौर पर विपक्ष को एक मुद्दा मिल गया है। आम बुंदेली भी मायूस हैं। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद विशंभर प्रसाद निषाद का कहना है कि प्रधानमंत्री ने यहां के मजदूरों का अपमान किया है। इसका उन्हें विधानसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कहा कि फेंकू प्रधानमंत्री इधर-उधर के लच्छेदार भाषण देकर चले गए। बुंदेलखंड के लिए कोई सौगात नहीं दी। जबकि प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड को भरपूर मदद दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बसपा महासचिव जीसी दिनकर ने कहा कि प्रधानमंत्री का बुंदेलखंड का दौरा सिर्फ हवाहवाई रहा। तैयारियों में करोड़ों रुपये फूंक दिए गए। बुंदेलखंड को धेला बराबर राहत नहीं मिली। 43 अरब के कर्ज से जूझ रहे किसान आएदिन आत्महत्याएं कर रहे हैं। हार्ट अटैक से मौतों से हो रही हैं। पूरे बुंदेलखंड में पेयजल का गंभीर संकट है लेकिन इन सभी मुद्दों पर प्रधानमंत्री ने कोई तवज्जो नहीं दी। पूरा समय राजनीतिक दलों को कोसने में गुजारा। श्री दिनकर ने कहा कि बुंदेलखंड में बसपा का ही परचम फहराएगा।
कांग्रेस विधायक और प्रदेश उपाध्यक्ष दलजीत सिंह (तिंदवारी) ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे के बाद बुंदेलखंड के लोगों और खासकर किसानों, मजदूरों को भारी निराशा हुई है। मोदी जी की सरकार देश के पूंजीपतियों के अरबों, खरबों रुपये माफ कर रही है लेकिन भीषण संकट के दौर से गुजर रहे बुंदेलखंड के किसानों का कर्ज माफ करने में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। अन्ना प्रथा पूरे बुंदेलखंड के लिए अभिशाप बनी हुई है।
प्रधानमंत्री ने इन किसी भी ज्वलंत मुद्दों पर कोई बात नहीं की। लुभाऊ भाषण देकर चले गए। उधर, केन-बेतवा लिंक पर लगातार काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर ने कहा कि 50 मिनट के भाषण मेें प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड के किसानों पर बकाया 43 कर्ज का कोई जिक्र नहीं किया। किसानों को इससे भारी निराशा हुई है। पूरा समय सपा-बसपा की लूटखसोट बयां करने में बर्बाद किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक के गुणगान से पहले बेहतर होता कि प्रधानमंत्री इसका स्वयं जायजा लेते। उधर, सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से सभी को बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन यह सब मायूसी में बदल गया। महासचिव राजेंद्र यादव ने कहा कि बुंदेलखंड से भरपूर वोट लेकर अपने सभी सांसद जिताने के बाद भी भाजपा ने बुंदेलखंड से दगाबाजी की।