बांदा। ग्राम पंचायतों में बजट तो भरपूर पर ग्राम प्रधान इसे खर्च करने में कंजूसी दिखा रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष के नौ माह में महज 30 फीसदी धनराशि खर्च हो सकी है। 14वें वित्त आयोग से गांवों के विकास को शासन ने 40.33 करोड़ रुपये दिए थे। इसमें ज्यादातर धनराशि अभी डंप है। जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में महज 80 दिन का ही समय बचा है। ग्राम पंचायतों में लोग बुनियादी सहूलियतों को तरस रहे हैं।
शासन ने चित्रकूटधाम मंडल में 973 ग्राम पंचायतों में पुरानी जलापूर्ति, योजनाओं के पुनर्वास, पेयजल व स्वच्छता, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, मार्गों के मरम्मत व अन्य नागरिक सुविधाओं मुहैया कराने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 81 करोड़ 37 लाख रुपये पंचायती राज विभाग को मुहैया कराए। इसमें परसंपत्तियों के रख-रखाव समेत अन्य विकास कार्य कराए जाने हैं। फिर भी समस्याएं लेकर ग्रामीण विभागों में दौड़भाग कर रहे हैं। बांदा जनपद में 471 ग्राम पंचायतों के लिए 14वें वित्त से 40 करोड़ 33 लाख रुपये मिले। इसमें से महज 10 करोड़ रुपये ही प्रधान खर्च कर पाए। यह कुल 25 फीसदी है। जिले में अभी 30 करोड़ रुपये डंप हैं। चित्रकूट जिले में 28 करोड़ 13 लाख में 25 करोड़ 26 लाख रुपये, हमीरपुर में 31 करोड़ में 23.86 करोड़ और महोबा में 28 करोड़ में 22 करोड़ 11 लाख रुपये ही खर्च हुए। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि मार्च तक सभी पैसा खर्च कर लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। उधर, भारत स्वच्छता मिशन के आगे विकास के अन्य कार्यों पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
‘स्वच्छता मिशन शासन की प्राथमिकता है। विकास कार्यों की कार्ययोजना बनाकर देने में प्रधानों की ओर से विलंब हुआ है। अब सभी की कार्ययोजनाएं आ रही हैं। तेजी से काम कराया जा रहा है। मंडलीय बैठक में डीपीआरओ और एडीओ (पंचायत) को कड़ी हिदायत दी गई।’ दिनेश कुमार सिंह, पंचायतीराज निदेशक