न बाबा न। ये नई करेंसी का नोट नहीं लेंगे। इसका एक्सचेंज भी मुसीबत है।
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रविवार की छुट्टी ने बैंकों में और भीड़ जुटाई। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा और सिटी ब्रांच में हालात बेकाबू होते-होते बचे। जमा और निकासी के लिए परेशान लोगों ने दोनों बैंकों के मुख्य चैनल तोड़ने की कोशिश की। गिने-चुने पुलिस कर्मियों को भीड़ नियंत्रण करने में पसीने छूट गए। यह भीड़ यूं भी ज्यादा रही कि सोमवार को बैंकों की बंदी घोषित की गई है।
500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध लगाने से मचा भूचाल और बवाल थम नहीं रहा। रविवार को पांचवें दिन छुट्टी के बावजूद बैंकों में लेन-देन करने वालों का भारी हुजूम उमड़ा। उधर, चार दिनों की धमाचौकड़ी से बैंकों ने कोई सबक नहीं लिया। अतिरिक्त व्यवस्थाएं नहीं की गईं। प्रशासन भी चुप्पी साधे है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा जिलाधिकारियों को दिए गए निर्देश हैं कि मोबाइल वैन की व्यवस्था करके जरूरतमंदों को नोट बंटवाए जाएं। लेकिन इस आदेश पर फिलहाल यहां कोई अमल नजर नहीं आया। प्रभारी जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता का कहना है उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है।
कचहरी स्थित मुख्य ब्रांच परिसर में बेकाबू होते लोगों ने मुख्य गेट का चैनल तोड़ने की कोशिश की। बैंक के सुरक्षा कर्मियों और वहां ड्यूटी पर मौजूद इक्का-दुक्का पुलिस कर्मियों ने बमुश्किल स्थिति नियंत्रित की। शाम को रामलीला मैदान के सामने स्थित सिटी ब्रांच में यही स्थिति आई। यहां सुबह से लाइन में खड़े भूखे-प्यासे लोग बैंक बंद होने के समय आपा खो बैठे।
चैनल तोड़कर बैंक में घुसने की कोशिश की। इकलौते कांस्टेबिल ने बैंक कर्मियों की मदद से उन्हें रोका। उधर, बैंक प्रबंधक और स्टाफ में इस बात को लेकर रोष है कि रोजाना हो रहे हंगामे के बाद बैंक जैसे संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात नहीं किया जा रहा। प्रशासन भी चुप्पी साधे है।