यूरिया और डीएपी खाद संकट के विरोध मेें आए दिन मंडी
परिषद और सामने स्थित नेशनल हाइवे पर प्रदर्शन और जाम का काट अधिकारियों ने
ढूंढ लिया है।
अब मंडी परिषद में खाद का वितरण नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों की समितियों से किसानों की आवाज प्रशासनिक अफसरों तक
जाएगी ही नहीं।
कृषि विभाग, पीसीएफ और कोआपरेटिव विभाग के अफसर
डीएपी और यूरिया के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे किसानों को सुविधाएं देने
की बजाय शासन-प्रशासन के अफसरों को फजीहत बचाने का उपाय कर रहे हैं। मंडी
परिषद में डीसीडीएफ, यूपी एग्रो और पीसीएफ केंद्र संचालित हैं।
ये
केंद्र शहर में होने की वजह से घर तक खाद ले जाने में किसानों को आसानी
होती है। उनके गांवों के रूट पर चलने वाली टैक्सियों में भाड़ा भी कम लगता
है। इसी वजह से आसपास के करीब 50 गांवों के किसान यहां खाद लेने आते हैं।
खाद केंद्र बंद रहने पर किसान यहां प्रदर्शन और जाम लगाते हैं। अफसरों को
मौके पर पहुंचकर किसानों को संभालना पड़ता है।
अब मंडी समिति में
खाद न बांटने की अघोषित रणनीति अपनाई गई है। पीसीएफ केंद्र प्रभारी हेमंत
कुमार और यूपी एग्रो प्रभारी कमल ने बताया कि हाल ही मेें आई यूरिया खाद की
खेप में मंडी परिषद को आवंटन नहीं मिला। खाद सीधे ग्रामीण इलाकों की
सोसायटियों में भेज दी गई है।
उधर, जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद
यादव ने कहा कि मंडी परिषद में किसान हंगामा करते हैं, इसलिए अब यहां खाद
नहीं आवंटित की जाएगी। सहकारी समितियों में ही वितरण होगा। एआर कोआपरेटिव
सुरेश कुमार ने बताया कि शहर में ‘जुगाड़’ वाले ज्यादा परेशान करते हैं।
इससे भी बचत होगी और समितियों में किसानों को आसानी से खाद मिलेगी।