शीतलहर से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की शामत आ गई है। अस्पताल प्रशासन ने ठंड से बचाव के कोई उपाय नहीं किए। पहले जो ब्लोवर लगाए गए थे, वे भी नदारद हैं। दीवारों में उनका मात्र स्टैंड (ढांचा) नजर आ रहा है। मरीजों को दिए गए कंबल इतने हल्के हैं कि उनके सहारे सर्द रातें नहीं काटी जा सकतीं। उधर, पुराने इमरजेंसी कक्ष को कबाड़खाना और साइकिल स्टैंड बना दिया गया है।
कोहरे और ठंड से तापमान में भारी गिरावट आई है। भले-चंगे लोग ठिठुर रहे हैं। ऐसे में बीमार और कमजोर मरीजों की और हालत पतली है। उन्हें ठंड से बचाया न गया तो जानलेवा साबित हो सकता है। जिला अस्पताल में पांच सौ से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।
वार्डों में तीन साल पहले लगाए गए ब्लोवर का अब कहीं अता-पता नहीं है। इन ब्लोवरों की गर्म हवा से वार्ड का तापमान काफी बढ़ा रहता था। मरीजों को ठंड में ठिठुरना नहीं पड़ता था। पुरुष वार्ड, महिला वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड, हृदय रोग समेत एनआरसी में 19 ब्लोवर लगाए गए थे, ये सभी गायब हैं।
उधर, मरीजों को दिए जा रहे कंबल भी बहुत पतले हैं। मात्र एक कंबल दिया जा रहा है। इससे ठंड नहीं दूर हो सकती। तीमारदार राकेश सिंह (तिंदवारी), अकील खां (चिल्ला), सुखरानी देवी (बिजलीखेड़ा) ने बताया कि कंबलों से मरीज की ठंड दूर नहीं हो रही। ये घटिया क्वालिटी के हैं। इनसे बदबू भी आ रही है। यह भी बताया कि कंबल मांगने पर वार्ड की नर्सें झिड़क कर भगा देती हैं। तमाम फरियादों के बाद भी एक के अलावा दूसरा कंबल नहीं दिया जाता। सबसे ज्यादा शामत सांस, दमा, हृदय रोगियों और वृद्धों की है। इन्हें ठंड ज्यादा सता रही है।
चोरी के डर से दिया जा रहा एक कंबल
कड़ाके की ठंड में भी ब्लोवर नदारद रहने पर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. किशोरीलाल का कहना है कि वार्डों में लगे ब्लोवर खराब हो गए थे। उन्हें मरम्मत के लिए भेजा गया है। जल्द ही मंगाकर लगाया जाएगा। उधर, मरीज को सिर्फ एक कंबल देने के सवाल पर अधीक्षक ने अजीबोगरीब वजह बताई। कहा कि कंबल चोरी हो जाने के डर से मात्र एक कंबल दिया जा रहा है। कंबलों का स्टाक भी कम है। सीएमएस ने यह भी बताया कि ठंड से होने वाली बीमारियों के लिए जिला अस्पताल में दवाओं का पर्याप्त भंडार है।
मार्निंग वाक हो सकता घातक, गर्म कपड़े पहने रहें
कोहरा और कड़ाके की ठंड में बूढ़ों, बच्चों और दिल के मरीजों के लिए ज्यादा नुकसानदेह और खतरनाक है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एसडी त्रिपाठी ने कहा कि मौजूदा मौसम में मार्निंग वाक भी घातक हो सकता है। बाहर निकलते समय पूरे शरीर को गर्म कपड़ों से ढंके रखें। गर्म चाय और अन्य गर्म पेय ज्यादा लें। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने कहा कि बच्चों को रात दिन गर्म कपड़े पहनाकर रखें। उन्हें खुले मौसम में न रखें। ठंड के लक्षण नजर आते ही डाक्टर को तत्काल दिखाएं।