बांदा। एसआईआर (विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण) सर्वे का काम शुरू हो गया है। दावा किया जा रहा है कि तीन लाख वोटरों तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं लेकिन बहुत से मतदाताओं के पते बदलने से ढूंढे नहीं मिल रहे। गांवों में तो अधिकतर मतदाताओं के पास पुराने दस्तावेज व फोटो ही नहीं है। जिससे बीएलओ खासे परेशान हैं। उनका कहना है कि यहीं हाल रहा तो तय समय पर सर्वे का काम पूरा होने वाला नहीं है अन्यथा बड़ी संख्या में वोटरों के नाम सूची से हट जाएगें।
जनपद की चार विधानसभाओं में 13 लाख 49 हजार 521 वोटर हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाताओं को एसआईआर (विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण) सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। दावा किया जा रहा है कि बीएलओ अब तक तीन लाख वोटरों तक पहुंच चुके हैं और उन्हें गणन प्रपत्र भी उपलब्ध करा दिए हैं। मतदाताओं का सत्यापन वर्ष 2003 की मतदाता सूची के अनुसार किया जा रहा है लेकिन बीएलओ के सामने शहरी क्षेत्रों में सबसे बड़ी दिक्कत मतदाताओं के पते बदल जाने की हो रही है। तमाम मतदाता नियत पते पर मिल ही नहीं रहे हैं।
गांवों में मतदाताओं के पास पुराने दस्तावेज व फोटो नहीं है। मतदाता गणना प्रपत्र भरने में रूचि भी नहीं दिखा रहे है। ज्यादातर घरों में बड़े बुजुर्ग नहीं मिलते हैं वह सुबह से खेतों में चले जाते हैं। खेतों में उनसे संपर्क किया जाता है तो पुराने दस्तावेज के सवाल पर चुप्पी साध जाते हैं। कहते हैं भइया हमारे पर वोटर कार्ड तक निहाय। वोटर पर्ची मिल जात रही है तो आधार लैके वोट डार आवत रहे हैं। ऐसे में बीएलओ खासे परेशान हैं।
बीएलओ रामकिशुन का कहना है कि गणना प्रपत्र में वर्ष 2003 के तहत निर्वाचन का नाम, ईपीआईसी संख्या (यदि उपलब्ध हो) संबंधित का नाम, जिला, राज्य, विधानसभा क्षेत्र का नाम व संख्या, भाग संख्या, क्रमांक की जानकारी आदि भरना है। एक पासपोर्ट फोटो भी लगेगा। बीएलओ सियाराम ने बताया कि कई घरों में तो बूढ़े माता-पिता हैं। लड़के सब महानगरों में हैं।
बूढ़े माता पिता कुछ भी बताने व प्रपत्र दिखाने में असमर्थता जता रहे हैं। बोलते है सब भइया लड़कन के पास है। जब वह अहिए तो मिली। एडीएम कुमार धर्मेद्र का कहना है कि एसआईआर सर्वे का काम नियत समय पर पूरा होगा। इसके लिए जन प्रतिनिधियों, समाजसेवियों व गांवों में प्रधान, सदस्य, बीडीसी आदि से सहयोग मांगा गया है।