बांदा। कोरोना और ब्लैक फंगस को अवसर में बदल कर कमाई करने में जुटे मेडिकल स्टोरों पर खाद्य एवं औषधि विभाग ने शिकं जा कसा है। शुक्रवार को करीब एक दर्जन मेडिकल स्टोरों में छापे मारकर दवाओं के अभिलेख और नमूने अपने कब्जे में लिए। उधर, 20 दिन पहले शहर में पकड़े गए 44 गत्ते सैनिटाइजर में एथाइल एल्कोहल मानक से कम पाया गया है। कंपनी और स्थानीय विक्रेता के विरुद्ध कोर्ट में केस दायर किया जा रहा है।
औषधि विभाग की टीम ने शहर के अलीगंज स्थित एक एजेंसी में एंटी फंगल, स्टेरायड दवाओं का बिक्री रजिस्टर चेक किया और संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए। नरैनी और कालिंजर के एक-एक मेडिकल स्टोरों से सैनिटाइजर व एंटीबाइटिक दवाओं के नमूने लिए। दवाओं के रखरखाव में लापरवाही पर इन्हें कड़ी चेतावनी दी गई।
लाइसेंस को फ्रेम करने और दुकान के बाहर फर्म का नाम-पता और लाइसेंस नंबर लिखाने के निर्देश दिए। टीम ने बांदा शहर के सब्जी मंडी, जिला अस्पताल और सिविल लाइन में चल रहे मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया। सभी को निर्देश दिए कि दुकान के सामने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए चूने के गोले व बैरिकेडिंग कराएं। विभाग के इंस्पेक्टर सूर्यकांत गुप्ता ने बताया कि लिए गए नमूनों को जांच के लिए राजकीय लैब लखनऊ भेजा जाएगा।
उधर, सात मई को कालू कुआं से बरामद की गई 44 गत्ते सैनिटाइजर की जांच रिपोर्ट लखनऊ लैब से आ गई है। विभाग के मुताबिक जांच रिपोर्ट में सैनिटाइजर में मात्र 49.56 प्रतिशत एथाइल एल्कोहल पाया गया है। यह मानक के मुताबिक नहीं है, जबकि इसमें लगे लेबल पर 70 फीसदी एथाइल एल्कोहल प्रिंट है। निर्माता कंपनी दोषी है।
ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि डीलर शिवम सिंह को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। साथ ही पल्स ऑक्सीमीटर व सैनिटाइजर से संबंधित बिक्री अभिलेख भी तलब किए गए हैं। जांच के बाद कंपनी और संलिप्त दोषियों के विरुद्ध कोर्ट में केस दायर किया जाएगा। साथ ही बरामद सैनिटाइजर न्यायालय के आदेश पर नष्ट किए जाएंगे।