बांदा। इस्लामी दीनी तालीम के लिए मशहूर मदरसा जामा अरबिया, हथौरा में सालाना जलसा दस्तार बंदी और खत्म बुखारी (दीक्षांत समारोह) आयोजित हुआ। विभिन्न दीनी कोर्स पूरा करने वाले लगभग 400 तलबा (छात्रों) को देश के मशहूर इस्लामी विद्वान आलिमों ने सनद सौंपी और उनके सिर पर पगड़ी (दस्तार) बांधी। नसीहत दी कि अपने दीनी इल्म से इंसानों को फायदा पहुंचाएं।
हथौरा गांव स्थित मदरसा की मस्जिद में सुबह से दोपहर तक जलसा चला। खास मेहमान मशहूर धर्मगुरु मौलाना शेख जकरिया और मौलाना मुफ्ती हबीबुर्रहमान ने कोर्स पूरा कर लेने वाले तलबा को कई नसीहतें और हिदायतें दीं। कहा कि जो दीनी इल्म हासिल की है, उससे इंसानों को फायदा पहुंचाएं। नबी के बताए रास्ते पर चलकर सच्चे और अच्छे मुसलमान बनें। कहा कि बगैर भेदभाव मुल्क के सभी बाशिंदों से अच्छा बर्ताव करें।
जलसे में शामिल होने देश के कई जिलों से लोग आए। इनमें तलबा के परिजन भी थे। मदरसा के स्टाफ और तलबा ने सभी का इस्तकबाल किया। मदरसा नाजिम (संचालक) मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद ने जलसे में शामिल लोगों का शुक्रिया अदा किया और तलबा को शाबासी दीं। कई तलबा ने नात पढ़ी।
विश्व विख्यात मदरसा दारुल उलूम नदवतुल उलमा (लखनऊ) के मुफ्ती मौलाना ज़ैद अहमद सहित मदरसा हथौरा के मुफ्ती उबैदुल्ला, मुफ्ती नजीब अहमद कासमी, मौलाना अब्दुर्रज्जाक , मौलाना स्वालेह आजमी, मौलाना अनीस, मौलाना हाफिज अनस अहमद, मौलाना फरीद समेत मदरसा का पूरा स्टाफ और तलबा तथा गांव के लोग शामिल रहे। जलसा दुआ के साथ खत्म हुआ।
जामा अरबिया, हथौरा के जलसा दस्तारबंदी में जिन तलबा (छात्रों) को कोर्स मुकम्मल करने पर सनद दी गई उनमें किरत के 137, हिफ्ज के 120, तजवीद के 137, दौरे हदीस के 75 , इफ्ताह के 29, इंगलिश के 10 और अरबी अदब के 8 तलबा छात्र शामिल हैं।