फोटो - 14 अजेय कालिंजर दुर्ग का एक दृश्य। संवाद
नरैनी। ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित किया गया है, जिससे क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस निर्णय से दुर्ग के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व को नई पहचान मिली है।
कालिंजर दुर्ग बुंदेलखंड की शान है और इसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यहां प्राचीन मंदिर, शिलालेख, विशाल द्वार और कलात्मक स्थापत्य कला इसकी समृद्धि दर्शाते हैं। राष्ट्रीय विरासत स्थल का दर्जा मिलने के बाद अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसके संरक्षण और रखरखाव के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, साथ ही बुंदेलखंड की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
कालिंजर क्षेत्र के अरविंद छिरोलिय, शैलेन्द्र, सईद अहमद, संतोष कुमार, दयाराम सोनकर, रमाकांत द्विवेदी, राजकुमार पटेल सहित अन्य लोगो ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि कालिंजर दुर्ग को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित किया जाना बुंदेलखंड के लिए गौरव की बात है। इससे आने वाले समय में किले के विकास और संरक्षण के कार्यों को नई दिशा मिलेगी।