पिछले हफ्ते पुलिस के मोबाइल की दुकानों में छापेमार कार्रवाई के दौरान बरामद 2256 सिमकार्डों की जांच अब भारतीय दूर संचार अधिकारियों ने शुरू कर दी है। इस विभाग की 10 सदस्यीय टीम ने गुरुवार को यहां पुलिस के साथ अदालत में सिम कार्डों की जांच की। विभागीय सहायक निदेशक ने अमर उजाला में छपी खबर को संज्ञान में लेने के साथ ही सराहा भी।
11 सितंबर को बांदा पुलिस ने शहर की कई दुकानों में छापे मारकर बड़ी संख्या में अवैध रूप से एक्टिवेट किए गए सिम कार्ड, मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए थे। छह दुकानदारों को गिरफ्तार किया था। यह सभी जेल में हैं। सीजेएम कोर्ट से उनकी जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है।
गुरुवार को दूर संचार प्रवर्तन संसाधन एवं निगरानी प्रकोष्ठ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के महानिदेशक विनय प्रताप सिंह के निर्देश पर सहायक महानिदेशक शैलेंद्र और सहायक निदेशक नरेंद्र कुमार प्रजापति के साथ 10 सदस्यीय टीम बांदा आई।
एसपी राकेश शंकर से मिलकर बरामद सिम जांच के लिए टीम को सौंपने का अनुरोध किया। एसपी के आदेश पर शहर कोतवाल एके सिंह ने सीजेएम न्यायालय में अर्जी देकर अनुमति ली और सीलबंद सिमों को बंडल खुलवाया।
इसमें 2256 सिम थे। इनमें वोडा, आईडिया, एयरटेल, डोकोमो, यूनीनार और रिलायंस इत्यादि कंपनियों के सिम शामिल हैं। जांच टीम ने सभी सिम कार्डों के नंबर अपने अभिलेखों में दर्ज किए।
सहायक महानिदेशक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जांच में पता किया जाएगा कि इन सिमकार्डों को किसने और किस उद्देश्य से एक्टिवेट किया।
संबंधित सिम कंपनियों के विरुद्ध भी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने बताया कि सिमों की बरामदगी संबंधी खबर अमर उजाला मेें प्रमुखता से प्रकाशित की गई। यह लखनऊ के अंक पर भी छपी थी। सहायक महानिदेशक ने खबर के साथ ही यहां के एसपी को भी सराहा।
गौरतलब है कि इस मामले में शहर के छह दुकानदार बृजेश कुमार निषाद, दीपू प्रजापति, गुड्डू राईन, मनीष कुमार गुप्ता, दीपक कुमार रैकवार और ओमबाबू को जेल भेजा गया है।
सहायक निदेशक ने बताया कि इन सभी पर रासुका भी लगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। गृह मंत्रालय के निर्देश पर दूर संचार सेवा प्रदाता कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।