बांदा। बरियारपुर बांध से मध्य प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा खोदी जा रही नहर के विवाद को लेकर शनिवार को दूसरे दिन भी यूपी-एमपी के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। एमपी के अधिकारी अपनी दावेदारी में आज भी कोई अभिलेख पेश नहीं कर सके।
उधर, एमपी के अभियंताओं और नहर खुदवा रहे ठेकेदार ने मध्य प्रदेश शासन से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। इधर, यूपी (बांदा) के अभियंता डीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज रहे हैं। नहर खुदाई का काम फिलहाल रुका है।
बरियारपुर बांध से मध्य प्रदेश का सिंचाई विभाग ढाई किलोमीटर से ज्यादा लंबी नहर खोदकर पन्ना जनपद के मझगवां में बन रहे बांध में मिला रहा है, ताकि बरियारपुर बांध का पानी मझगवां बांध ले जाया जा सके, जबकि गंगऊ और बरियारपुर बांधों का पानी उत्तर प्रदेश का है।
इन बांधों का रखरखाव और खर्च यूपी का सिंचाई विभाग करता है। बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय के अधिशासी अभियंता योगेश रावल ने बताया कि बरियारपुर बांध से यूपी को 36 टीसीएम (ट्रिलिएंट क्यूबिक मीटर) पानी मिलता है।
एक पखवारे से ज्यादा समय से खोदी जा रही नहर की सुध बांदा के सिंचाई विभाग ने नहीं ली। शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से खबर छपने पर डीएम योगेश कुमार ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं की क्लास ली। इस पर अधिशासी अभियंता योगेश रावल और जेई मनोज कुमार बरियारपुर पहुंचे।
एमपी के अभियंताओं से विरोध जताते हुए नहर का काम रुकवा दिया। शनिवार को दूसरे दिन भी दोनों सूबे के अभियंताओं की बैठक हुई, लेकिन एमपी के अभियंता यूपी सिंचाई विभाग की कब्जे वाली जमीन में अपनी नहर खुदवाने का कोई अभिलेखीय दावा पेश नहीं कर सके।
लिहाजा नहर खुदाई का काम दूसरे दिन भी बंद रहा। अधिशासी अभियंता ने बताया कि एमपी के अभियंताओं को स्पष्ट शब्दों में बता दिया गया है कि बिना अभिलेखीय सबूत और अनुमति के नहर खुदवाने का काम चालू न करें। अधिशासी अभियंता ने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता और डीएम को दे रहे हैं। उधर, डीएम योगेश कुमार ने कहा है कि वे प्रदेश के मुख्य सचिव को इस बारे में लिख रहे हैं।
1907 में बांध बना, 1977 में बंटवारे का समझौता
बांदा। बरियारपुर, गंगऊ और रनगवां बांधों के पानी पर मध्य प्रदेश की नीयत हमेशा से खराब रही। वहां के जनप्रतिनिधियों ने कई बार दबंगईपूर्वक बांधों में धावा बोलकर यूपी का पानी एमपी में बहा दिया। अब वहां का सिंचाई विभाग नहर खोदकर यूपी का पानी हड़पना चाहता है। बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय के एक्सईएन योगेश रावल ने बताया कि बरियारपुर बांध 1907 में बना था।
इस बांध के पूरे पानी पर बांदा का अधिकार था। 1977 में दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते में तय हुआ कि बांधों का रखरखाव यूपी (बांदा) सिंचाई विभाग करेगा, इसलिए पानी पर यूपी का हक भी ज्यादा रहेगा, लेकिन अक्सर एमपी के लोग समझौते का उल्लंघन कर पानी लूट लेते हैं। अक्सर डेड स्टोर होने के बाद भी सैल्यूस गेट खोलकर तलहटी पर जमा पानी निकाल लेते हैं। कई बार ऐसे विवाद हो चुके हैं।
एई-जेई बचेंगे, सींचपाल नपेंगे
बांदा। नहर खुदाई की सूचना यहां के सिंचाई विभाग और प्रशासन के अधिकारियों को न मिलने से विभाग की खासी किरकिरी हो रही है। इसके पीछे जेई से लेकर एई तक का बांध में न जाना मुख्य वजह माना जा रहा है। इस मामले में लापरवाही की गाज बांध में तैनात सींचपाल पर गिर सकती है।
बड़े बच सकते हैं। अधिशासी अभियंता योगेश रावल का कहना है कि सींचपाल अनिल कुमार ने सूचना नहीं दी। सात दिनों से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सींचपाल के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। जेई और एई के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा।