बांदा। सहकारी बैंकों में पुराने नोट जमा और बदलने पर लगी रोक के विरोध में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। बांदा व चित्रकूट के 27 शाखाओं में कामकाज ठप कर धरना-प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में किसानों की समस्याएं बताईं।
गुरुवार को कोआपरेटिव बैंक इंपलाइज यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने जिला सहकारी बैंक परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। पुराने नोटों के लेन-देन पर रिजर्व बैंक की रोक को लेकर नाराजगी जताई। यूनियन नेताओं ने सहकारी बैंकों से भेदभाव का आरोप लगाया। लगभग चार घंटे बाद कलेक्ट्रेट आकर अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया।
इसमें कहा गया है कि सहकारी बैंकों में पुराने नोटों का लेन-देन बंद करने का प्रभाव किसानों पर ज्यादा पड़ा। अधिकांश किसानों के खाते इन्हीं बैंकों में हैं। रिजर्व बैंक ने नाबार्ड द्वारा जिला सहकारी बैंकों को किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ऋण वितरण को धनराशि देने के निर्देश दिए, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक द्वारा राशि नहीं दी जा रही। ऋण वितरण पूरी तरह बंद है। किसान खाद-बीज के लिए परेशान हैं।
किसानों की समस्या दूर करने के लिए प्रतिबंध हटाने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में चंद्रशेखर चौरसिया, सर्वेश तिवारी, अरविंद अवस्थी, कीर्ति खरे, रवि वर्मा, संतोष द्विवेदी, सुरेश कुमार अग्निहोत्री, रवीश, राजेश, गजेंद्र, सुनीता, गीता, नीतू, मनोज, रामनरेश, देवेंद्र कुमार, संजीव कुमार, उबैदुल हक, शंकर, रामनारायण, रविकांत दीक्षित, रवि कुमार, रेनू, जगत नारायण आदि शामिल रहे।