एनजीटी और हाईकोर्ट की तमाम चेतावनियों का बालू माफियाओं पर असर नहीं हो रहा। प्रमुख नदियों को बांधकर जलधारा को प्रभावित करने का अपराध बदस्तूर जारी है। प्रशासन जलधारा में खड़े किए गए अवरोध तोड़ने की रस्मी कार्रवाई के बाद चुप्पी साध लेता है।
बालू माफिया तोड़ी गई बंधियां फिर बांध लेते हैं। इसका ताजा उदाहरण बांदा जिले की सरहद से जुड़े मध्य प्रदेश में केन, बागै और रंज नदियां हैं। यहां मध्य प्रदेश के बालू कारोबारियों और माफियाओं ने नदी की जलधारा रोककर ट्रकों के लिए रास्ता बना दिया है। नतीजतन नदी का पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा। बांदा जिले के तमाम गांवों में पशुओं को भी पानी के लाले पड़ रहे हैं।
बांदा जिले की बिल्हरका (नरैनी तहसील) ग्राम पंचायत में केन नदी के उस पार मध्य प्रदेश के बसिया और तरई गांव में बालू की खदानें हैं। एमपी के बालू ठेकेदारों ने केन नदी की जलधारा को बांधकर बालू की दीवार खड़ी कर उस पर रास्ता बना लिया है। नतीजतन बांदा जिले के बोड़ा पुरवा, कनाय, नहरी, लहुरेटा, नसेनी, मानपुर आदि गांवों के पास केन नदी पतली जलधारा में सिकुड़कर रह गई है।
ऊपर का पानी यहां नहीं पहुंच पा रहा। इसी तररह गुढ़ा खुर्द, नेढ़ुवा, बड़ैछा, मोहनपुर, खलारी, मानपुर, बरसड़ा आदि गांवों के पास बागै और रंज नदियों की जलधारा को बांध दिया गया है। आगे के गांवों में पानी नहीं पहुंच पा रहा। अगले महीने पड़ने वाली गर्मी में नदी का पानी और सूख जाने के आसार हैं।
उधर, इस बाबत नरैनी (बांदा) तहसीलदार दिलीप कुमार वर्मा का कहना है कि लेखपालों को मौके पर भेजकर जांच करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बिल्हरका में केन नदी के रास्ते को खुदवाकर बंद किया जा चुका है। नदी में बने अवैध रपटे तोड़े जाएंगे। जलधारा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।