Banda: The family of the state bird crane is decreasing, 424 cranes were found in the calculation, in the past the number was 440, in Mahoba, on the verge of extinction, only six were found
- फोटो : BANDA
बांदा। राजकीय पक्षी सारस के कुनबे में लगातार कमी आ रही है। पिछली गणना में चित्रकूटधाम मंडल में 440 सारस विभिन्न स्थलों पर दिखे थे। तीन माह पूर्व हुई गणना में अब इनकी संख्या घटकर 424 रह गई। महोबा जनपद में यह पक्षी लुप्त होने के कगार पर है। चित्रकूट और हमीरपुर में भी इनकी संख्या तेजी से घटी है। अलबत्ता बांदा में सारस का कुनबा बढ़ा है।
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शासन के आदेश पर साल में दो बार राजकीय पक्षी सारस की गणना होती है। इसका जिम्मा वन विभाग संभालता है। नदी, पोखरों, खेतों आदि में सुबह और शाम के समय दो-दो घंटे वन कर्मी गणना करते हैं। हाल में हुई गणना में महोबा में मात्र छह सारस पाए गए। ये नई कबरई, रहेलिया तालाब और दहीला तालाब (पचपहरा) में नजर आए। यहां सारस लुप्त होने की श्रेणी में आ गए हैं। पूर्व में इनकी संख्या लगभग 26 थी, अब छह है।
इसी तरह चित्रकूट जनपद में पूर्व में 63 सारस पाए गए थे। अब इनकी संख्या 34 हो गई है। हमीरपुर जनपद में 72 से घटकर 54 सारस रह गए। अलबत्ता सारस के कुनबे में बांदा जनपद में बेहतर वृद्धि रही। पूर्व में यहां इनकी संख्या 289 थी। हाल की गणना में बढ़कर 330 हो गई।
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प्राकृतिक वास खत्म होने से घट रही संख्या
वन विभाग के मुताबिक, प्राकृतिक वास यानी वेटलैंड का स्वरूप बिगड़ने से सारस पक्षी में तेजी से कमी आ रही है। सूखते और सिकुड़ते तालाब और सारस के वास स्थलों पर कब्जे भी मुख्य वजह बताए गए हैं। खेतों के ऊपर से गुजरे हाईटेंशन लाइन के करंट की जद में आने से मौतें हो रही हैं। सबसे ज्यादा सारस नदियों किनारे पाए जाते हैं, लेकिन नदियों में अवैध खनन और मशीनों के शोर-शराबे से सारस अब नजर नहीं आते हैं।
प्राकृतिक वास का स्वरूप बिगड़ने की वजह से सारस दूसरे स्थानों पर ठिकाना बना रहे हैं। राजकीय सारस के संरक्षण और उनका कुनबा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इनके शिकार पर प्रतिबंध है। - संजय अग्रवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, बांदा।