बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में बारिश के बाद भी भूगर्भ जल स्तर में खास सुधार नहीं हुआ। प्री-मानसून (बारिश से पहले) और पोस्ट मानसून (बारिश के बाद) की रिपोर्ट के आंकड़ों में 21 गांवों में भूजल स्तर करीब एक मीटर और गिर गया। वहीं नौ गांव अभी भी सूखा (ड्राई) में दर्ज हैं। अन्य गांवों में बमुश्किल तीन से पांच मीटर जलस्तर बढ़ा है।
इस वर्ष बारिश का सीजन बीतने के बाद भूगर्भ जल विभाग द्वारा तैयार रिपोर्ट में जारी आंकड़ों में इसका खुलासा हुआ है। बांदा जिले के आठ ब्लाकों में बमुश्किल 3-4 मीटर जल स्तर बढ़ा है। जबकि नौ गांवों में जल स्तर प्री-मानसून से भी नीचे चला गया है।
चित्रकूट जनपद के पांच ब्लाकों में 4-5 मीटर भूजल स्तर में सुधार हुआ है। जबकि सात गांव क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गए हैं। यहां बारिश के बाद भी जल स्तर नीचे चला गया। हमीरपुर जिले के सात ब्लाकों में महज 3-4 मीटर जल स्तर बढ़ा है। जबकि इस जनपद के एक गांव में लगभग दो मीटर जल स्तर नीचे चला गया है।
महोबा जिले के चार ब्लाकों में तीन मीटर भूजल स्तर में सुधार होना बताया गया है। चार गांवों में भूजल स्तर की स्थिति ठीक नहीं है। यहां लगभग 2-3 मीटर भूजल नीचे पहुंच गया है।
चार्ट
बारिश के बावजूद मंडल के इन गांवों में नीचे खिसका जल स्तर-
बांदा : कतरावल, महोखर, गिरवां, खानपुर, रिसौरा, जसपुरा, रेहुटा, गुगौली व कोलावल रायपुर। ड्राई (सूखा) गांव : गड़रिया।
चित्रकूट : धवड़ा, पूरब पताई, शंभूपुर लौरी, महुआ, रानीपुर भट्ट, औदहा व सरैया। ड्राई (सूखा) गांव : दुबरी, छीबों, करौड़ी, गरगन पुरवा व खरौंद पुरवा।
हमीरपुर : सरीला।
महोबा : नहदौरा, रगोलिया बुजुर्ग, लेवा व रिवई। ड्राई (सूखा) गांव : रुरी कलां, टेइया व देवगनपुरा।
चार्ट-2
बारिश के बाद मंडल में ब्लाकवार भूजल स्तर में वृद्धि का ब्योरा (मीटर में)-
बांदा : बड़ोखर ब्लाक- 3.5, महुआ- 4, कमासिन- 3, बिसंडा 2.75, जसपुरा- 2, तिंदवारी- 2.5, नरैनी- 3.5 और बबेरू ब्लाक- 2.80 मीटर।
चित्रकूट : मऊ ब्लाक- 5 मीटर, रामनगर- 3 मीटर, पहाड़ी- 5 मीटर, कर्वी- 6 मीटर और मानिकपुर ब्लाक- 5 मीटर वृद्धि हुई।
हमीरपुर : कुरारा ब्लाक- 7 मीटर, सुमेरपुर- 6 मीटर, मौदहा- 3 मीटर, मुस्कुरा व सरीला- 4 मीटर, गोहांड व राठ ब्लाक- 3 मीटर।
महोबा : पनवाड़ी ब्लाक- 5 मीटर, कबरई- 3.5 मीटर, जैतपुर- 3 मीटर व चरखारी ब्लाक- 4 मीटर।
जल संचयन के प्रति अब जागरुकता जरूरी
बांदा। महिला डिग्री कालेज में भौतिक विज्ञान के प्रो.डा.जितेंद्र कुमार का कहना है कि जल संचयन संबंधी व्यवस्था पर्याप्त न होने से जलस्तर में वृद्धि ज्यादा नहीं हो पा रही है। बारिश के बाद भी भूजल स्तर की वृद्धि कमजोर होना चिंताजनक स्थिति है। इस पर सभी को मंथन और जल स्तर में सुधार के लिए कार्य करना होगा। यह मामूली सुधार है। गर्मी में भूजल स्तर और नीचे खिसक सकता है। अब संचयन के प्रति आम लोगों का भी जागरुक होना जरूरी है।
वर्जन
बारिश के बाद मंडल के चारों जिलों के ब्लाकों में जल स्तर में काफी हद तक सुधार हुआ है। हालांकि और सुधार की जरूरत है। सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए जल संचयन किया जा रहा है, लेकिन आम नागरिकों में इसके प्रति दिलचस्पी कम है। उन्हें भी इसके प्रति जागरुक किया जा रहा है।
- शेखर शशांक
अधिशासी अभियंता
भूगर्भ जल विभाग, बांदा।