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बलखड़िया का भतीजा खच्चू कर सकता है सरेंडर

Fri, 17 Jul 2015 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बलखड़िया की मौत के बाद कमजोर पड़े डकैतों के बीच से नई चर्चा आई है कि उसका भतीजा खच्चू जल्द ही पुलिस के समक्ष सरेंडर कर सकता है। खच्चू साल भर पहले कर्वी जुवेनाइल (अल्पवयस्क) जेल से फरार हुआ था। बताया जाता है कि खच्चू ने ही जंगल में अपने मोबाइल फोन से घायल और मृत बलखड़िया के फोटो खींचे थे।
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इधर, पुलिस सूत्र बताते हैं कि खच्चू का वह मोबाइल पुलिस के हाथ लग चुका है। उसी के जरिए बलखड़िया के फोटोग्राफ पुलिस के हाथ लगे। अब सवाल उठता है कि खच्चू का मोबाइल पुलिस के हाथ आया कैसे? घटनाक्रम के मुताबिक दो जुलाई को मारकुंडी थाना क्षेत्र के किहुुनियां जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान दस्यु सरगना बलखड़िया को गोली लगी थी। बाद में उसकी मौत हो गई।

गैंग सदस्यों ने राम-लखन पहाड़ में बलखड़िया के शरीर का दाह संस्कार कर दिया। इस सबकी फोटोग्राफी मोबाइल फोन पर उसके सगे भतीजे खच्चू पटेल ने की थी। चित्रकूट के एसपी पवन कुमार ने स्वयं कहा था कि खच्चू ने अपने रिश्तेदार पुष्पेंद्र पटेल को बुलाकर मोबाइल पर खींची गई मृत बलखड़िया की फोटो दिखाकर उसके घर-परिवार वालों को मौत के प्रति आश्वस्त किया था।
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बीहड़ के सूत्र बताते हैं कि चाचा बलखड़िया के मारे जाने से डरा खच्चू पटेल आत्मसमर्पण की फिराक में है। इस वजह से घर-परिवार वालों के जरिए उसने पुलिस से मेलजोल बढ़ाया। इसी रणनीति के तहत खच्चू का मोबाइल चित्रकूट पुलिस तक पहुंच गया।

मीडिया में बलखड़िया की फोटो वायरल हो गई। गैंग में भी फूट पड़ती दिख रही है, क्योंकि बलखड़िया के रहते खच्चू भी गैंग में अपना जोर दिखाता था। अब बलखड़िया के मारे जाने के बाद गिरोह के सदस्यों से उसकी पट पाना मुश्किल है।

बताया तो यहां तक जा रहा है कि तीन-चार लोगों के साथ वह गैंग छोड़कर अलग घूम रहा है और जल्द ही पुलिस के समक्ष सरेंडर करने की फिराक में है। उसके साथ कुछ और डकैत भी सरेंडर कर सकते हैं। इधर, पुलिस का दावा है खच्चू की तलाश जारी है। जल्द ही मुठभेड़ कर उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पांच लाख की लक्ष्मण रेखा नहीं पार कर पाया कोई डकैत
पाठा क्षेत्र में ददुआ, ठोकिया, रागिया और बलखडिय़ा जैसे बड़े-बड़े डकैत हुए लेकिन यूपी से उन पर घोषित इनाम पांच लाख की सीमा कोई पार नहीं कर सका। मतलब बड़ा डकैत तभी मारा गया जब उसके सिर पर पर इनाम पांच लाख हुआ।

यूपी-एमपी सीमा वाले पाठा में दस्यु समस्या पांच दशक से चली आ रही है। दशानन के सिर की तरह एक डकैत मरता है तो दूसरा पैदा हो जाता है। पांच दशक के दौरान सैकड़ों डाकू मारे गए लेकिन विषबेल आज भी फलफूल रही है।

नामी-गिरामी डकैत तभी मारा गया जब यूपी सरकार से उस पर इनाम पांच लाख हुआ। तीन दशक तक पाठा में आतंक का पर्याय रहे ददुआ को लंबे समय बाद तभी मारा जा सका जब उस पर इनाम पांच लाख हुआ। ददुआ के सफाए के लिए सरकार को करोड़ों खर्च करने पड़े, लेकिन सफलता पांच लाख का इनामी होने पर मिली।

ठोकिया का दस्यु जीवन आठ साल का रहा मारा तभी गया जब वह पांच लाख का इनामी हुआ। रागिया पर भी पांच लाख का इनाम था। इसे मारने में एमपी पुलिस को सफलता मिली। बलखड़िया के बाद अब बचा गैंग खुद फिलहाल कमजोर महसूस कर रहा है।

गिरोह में शामिल बबुली, लवलेश और चुन्नीलाल को छोड़कर अन्य सदस्यों को बीहड़ की ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसे में इनका सफाया करना पुलिस के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होना चाहिए।
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