बांदा। काम कम और दाम ज्यादा। शायद यही क्रेज नेट क्वालीफाई और लिपिक की नौकरी करने वाली लड़कियों को परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक बनने को आकर्षित कर रहा है। इसकी झलक गुरुवार को सहायक अध्यापक पद के लिए महिला अभ्यर्थियों की काउंसलिंग में नजर आई। कई संपन्न परिवारों की अभ्यर्थी लग्जरी कारों से यहां आईं। 336 महिला अभ्यर्थियों में 20 अनुपस्थित रहीं। 316 ने अभिलेखों की जांच कराई।
महानगरों की महिला अभ्यर्थियों ने भी बुंदेलखंड के पिछड़े जिले बांदा में नियुक्ति को अपनी पसंद में शामिल किया था। हालांकि अधिकांश का कहना है कि उनकी प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयताओं वाले जिले आवंटित नहीं किए गए। प्रयागराज, कानपुर, झांसी, फतेहपुर, उन्नाव की महिला अभ्यर्थी यहां सहायक अध्यापक बनेंगी।
काउंसलिंग में बीएसए हरिश्चंद्र नाथ और एबीएसए रामऔतार भी मौजूद रहे। अभिलेखों की जांच पड़ताल के लिए छह टेबल लगाई गईं थीं। गौरतलब है कि इसके पूर्व बुधवार को पुरुष अभ्यर्थियों की काउंसलिंग की गई थी। काउंसिलिंग का संचालन शिक्षक विधु त्रिपाठी ने किया।
तीसरी बार में सोनम का हुआ चयन
झांसी की सोनम सिंह एमएससी बीएड हैं। उनके साथ पति संदीप और गोद में 3 वर्ष का बेटा था। पति दिल्ली में शिक्षक हैं। उनका चयन तीसरी बार में हुआ। इसके पहले वह दो बार आवेदन कर चुकी थीं, लेकिन मेरिट में नहीं आ पाईं।
नेट क्वालीफाई हैं शशि शर्मा
प्रयागराज की शशि शर्मा की शैक्षिक योग्यता एमएड और शिक्षाशास्त्र से नेट क्वालीफाई है। वह बताती हैं कि कई साल से सहायक प्रोफेसर सहित अन्य पदों के लिए आवेदन करती रही हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब सहायक अध्यापक पर चयन हुआ है।
लिपिक की नौकरी छोड़ बनीं शिक्षक
फतेहपुर की एलिश शुक्ला को कौशांबी में निर्वाचन विभाग में कनिष्ठ लिपिक की नौकरी रास नहीं आई। बीएससी, बीएड की शैक्षिक योग्यता धारी अविवाहित एलिश परिषदीय स्कूल में नौकरी करने पर कहा कि शिक्षक पेशा उनका पसंदीदा जॉब है।
लिस शुक्ला।- फोटो : BANDA