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आतिशी के धुएं से दिवाली को जहरीला न बनाएं

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बांदा। दिवाली की खुशी आतिशबाजी के साथ मनानी है तो कुछ उपाय भी अपनाएं। पुराने तौर-तरीकों में बदलाव लाएं। महामारी संक्रमण के दौरान यह जरूरी है। अत्यधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से परहेज करें। ग्रीन आतिशबाजी से ही दिवाली रोशन करें।
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जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. हृदयेश पटेल का कहना है कि आतिशबाजी की बारूद हवा में मिल जाती है। श्वांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंच जाती है। श्वांस तंत्र को नुकसान पहुंचाने के अलावा हार्टअटैक का भी खतरा बढ़ा देती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी गुप्ता का कहना है कि बारूद के धुएं से आंखों में जलन पैदा हो सकती है। आंखें लाल होने के साथ ही पानी आने का खतरा बढ़ जाता है। नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र सिंह का कहना है कि तेज धमाकों से कान का पर्दे को नुकसान हो सकता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एमसी पाल का कहना है कि विषैले बारूदी धुएं से शरीर की त्वचा में जलन या लाल दाने पड़ सकते हैं।
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