अब्दुल्ला, अम्मार, अकरम, अय्याज व तकरीम।
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बांदा। सिर्फ 9 या 10 बरस की उम्र में पूरा कुरान हिफ्ज (कंठस्थ) करने वाले पांच बच्चों को जमकर शाबासी मिली। विश्वविख्यात मदरसा जामा अरबिया, हथौरा में इन बच्चों ने हिफ्ज का कोर्स पूरा कर लिया। शनिवार को मदरसे में आयोजित सादे समारोह में बच्चों को सराहा गया।
कुरान याद कर हाफिज बन गए इन बच्चों में नौ वर्षीय मोहम्मद तकरीम (छनेहरा, बांदा), अय्याज (बनारस), अम्मार (बांदा) और 10 वर्षीय अकरमा (बांदा) व अहमद अब्दुल्ला (हथौरा, बांदा) शामिल हैं। तकरीम को मौलवी सईद (बलरामपुर) ने हिफ्ज कोर्स पूरा कराया।
अन्य चार बच्चों को हाफिज महफूज की देखरेख में हिफ्ज किया। मदरसे में आयोजित सादे जलसे में मदरसा सरपरस्त मौलाना कारी हबीब अहमद, मौलाना सईद अहमद, मुफ्ती उबैदुल्ला और मौलाना गयासुद्दीन (धामपुरी) आदि शरीक रहे।