किसान आत्महत्याओं के साथ ही बुंदेलखंड में महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। बुधवार को यहां ‘महिला मुद्दों पर जन सुनवाई’ कार्यक्रम में ग्रामीण इलाकों से आईं महिलाओं ने आपबीती खुद बताई।
सुप्रीम कोर्ट कार्यालय के राष्ट्रीय सलाहकार डॉ.सज्जाद हसन (आईएएस) ने उनकी कहानी सुनीं। निजामी मंडप में यह आयोजन विद्याधाम समिति और एक्शन एड, लखनऊ ने संयुक्त रूप से किया।
नरैनी क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थिति थीं। बुंदेलखंड में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया गया। खास बात यह रही कि घूंघट में रहने वाली इन महिलाओं ने जन सुनवाई में बेझिझक अपनी कहानी खुद बयां की।
अनुसूचित जाति की सुशीला (झंडूपुरवा) ने बताया कि उसका पति नशेड़ी है। उस पर लांछन लगाता है। अर्चना (गुढ़ाकलां) ने ससुर की शर्मिंदगी भरी हरकत बयां की। कहा कि पति ने भी साथ नहीं दिया। बृजकुमारी (सुहाना), संगीता (अतर्रा), वंदना (बरकोला), सुमन व विद्या (बरुआ), सदाप्यारी (परसहर), सुखरानी (करैला पुरवा) आदि ने भी कहानी बयां की।
इन महिलाओं का दर्द सुनने के लिए मंच पर मौजूद पैनल में शामिल आईएएस अधिकारी डॉ.सज्जाद हसन ने कहा कि इन परिस्थितियों में महिला और पुरुषों दोनों को ही अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए।
एक्शन एड के क्षेत्रीय संयोजक खालिद चौधरी ने कहा कि ऐसे मामलों की सही पैरवी के लिए सामाजिक संगठनों को और ज्यादा जागरूक होना चाहिए। कार्यक्रम को अधिवक्ता वंदना द्विवेदी, समाजसेवी कल्पना सोनी और सरस्वती देवी ने भी संबोधित किया।
संचालन विद्याधाम समिति के राजाभइया ने किया। एक्शन एड कार्यक्रम अधिकारी राज सिंह ने आभार जताया। डा.जनार्दन त्रिपाठी, ओम तिवारी, अंबरीश भाई, विमलेश त्रिपाठी, अरविंद, बीना पांडेय, सुरेश कुमार, सुनीत, वर्षा, पुष्पलता, माया श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहीं।