बांदा/अतर्रा/तिंदवारी। जिले में शनिवार रात रामलीला के मंचों पर रामकथा के विविध प्रसंगों का मंचन हुआ। लंका दहन के दृश्य आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान प्रभु श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
बांदा के प्रागी तालाब स्थित रामलीला में विभीषण शरणागति, सेतु बंध, रामेश्वरम पूजा और अंगद-रावण संवाद का मंचन किया गया। रावण से अपमानित होकर विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंचे। अतर्रा के रघुनाथ भवन में श्रीरामचरितमानस समाज की रामलीला के 12वें दिन विभीषण शरणागति, रामेश्वर स्थापना और अंगद-रावण संवाद दिखाया गया। राम की भूमिका मोनू दीक्षित, लक्ष्मण की सचिन, विभीषण की रामऔतार, अंगद की श्रीराम और रावण की लखन ने निभाई। कमेटी अध्यक्ष कालका प्रसाद शिवहरे, महंत ताराचंद्र तिवारी समेत पदाधिकारी मौजूद रहे।
तिंदवारी में सूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध और सीता हरण का मंचन हुआ। कमेटी प्रबंधक हरवंश श्रीवास्तव, अध्यक्ष अनिल लखेरा, महामंत्री अरविंद गुप्त और कोषाध्यक्ष नमन गुप्त समेत पदाधिकारी मौजूद रहे।
बबेरू के रामलीला मैदान में 13वें दिन सीता की खोज और लंका दहन का मंचन किया गया। हनुमान की पूंछ में आग लगाने के बाद सोने की लंका जलाने का दृश्य देख दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। आयोजकों के अनुसार यहां करीब 180 वर्षों से रामलीला की परंपरा चली आ रही है। राम की भूमिका तन्मय पांडेय, लक्ष्मण की राघव पांडेय, हनुमान की अवधेश गौतम और रावण की रविशंकर पांडेय ने निभाई। समिति प्रबंधक नीरज पांडेय समेत पदाधिकारी मौजूद रहे।
फोटो-12-अतर्रा में रामलीला के दौरान मंचन करते कलाकार। संवाद
फोटो-12-अतर्रा में रामलीला के दौरान मंचन करते कलाकार। संवाद