बांदा। केंद्र सरकार की ओर से गेहूं के निर्यात पर रोक के फैसले ने चित्रकूटधाम मंडल के आढ़तियों में भी खलबली मचा दी है। इन आढ़तियों ने मुनाफाखोरी के इरादे से मंडल में लगभग 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर डंप कर रखा है। निर्यात पर ब्रेक से अब गेहूं के भाव गिर रहे हैं। अब दाम गिरने से आढ़तियों को झटका लगेगा। ऐन फसल के मौके पर भी आसमान छू रहे गेहूं के भाव अब एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के आसपास आ जाएंगे। बीते 24 घंटे के अंदर ही गेहूं की कीमत में लगभग 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। फुटकर बाजार में गेहूं 24 रुपये और आटा 30 रुपये किलो बिक रहा है।
मंडल में पहली अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई थी। लेकिन आढ़तियों ने लुभावने दाम और सुविधाएं बताकर किसानों को खरीद केंद्रों से कहीं ज्यादा अपनी ओर आकर्षित कर लिया। नतीजे में डेढ़ महीने में खरीद केंद्रों में सिर्फ 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो पाई है। दूसरी तरफ आढ़तियों ने इससे दोगुना ज्यादा गेहूं खरीदकर भंडार लिया है। गेहूं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से इन आढ़तियों को भरोसा था कि आने वाले महीनों में उनके द्वारा भंडारित गेहूं खजाना भर देगा।
लेकिन शनिवार को केंद्र सरकार की ओर से गेहूं निर्यात पर लगाई गई रोक के फैसले ने आढ़तियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इसका फौरी असर नजर आने लगा है। 24 घंटे के अंदर 100 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं के दाम गिर गए हैं। 2300 रुपये क्विंटल पर आ गए हैं। अभी भाव में और गिरावट के आसार हैं।
किसान और आढ़ती दोनों निकालेंगे अपना स्टाक
गल्ला व्यापार मंडल अध्यक्ष विष्णु गुप्ता का कहना है कि निर्यात पर रोक से गेहूं के दामों में गिरावट आएगी। साथ ही किसान अपनी फसल बेचने के लिए फिर सरकारी खरीद केंद्रों की तरफ रुझान करेंगे। निर्यात रोके जाने से आढ़ती और किसान दोनों पर असर पड़ेगा। जिन किसानों ने दाम बढ़ने की उम्मीद में अब तक गेहूं नहीं बेचा था वह अब गेहूं बेचेंगे। इसी तरह आढ़ती भी अपना स्टाक जल्दी निकालेंगे।
25 दिन में दो फीसदी भी नहीं हो पाई सरकारी खरीद
जिला विपणन अधिकारी सीपी पांडेय का कहना है कि खुले बाजार में गेहूं का भाव सरकारी मूल्य से अधिक होने का असर क्रय केंद्रों पर पड़ा है। 25 दिन में लक्ष्य के सापेक्ष दो फीसदी भी गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। किसान अधिक दाम मिलने से आढ़तियों को गेहूं बेच रहा है। निर्यात पर रोक के बाद अब गेहूं के दामों में गिरावट आएगी और किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए सरकारी क्रय केंद्रों में जाएगा।
सरकार एमएसपी बढ़ाए, डीजल-खाद के दाम घटाए
बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया कि सरकारें कभी भी किसानों के हित में नहीं रहीं। ये बानगी है कि जब गेहूं के दाम बढ़ने लगे तो सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी। जबकि खेती में इस्तेमाल होने वाली सामग्री डीजल, खाद आदि के दाम बढ़ ही रहे हैं। सरकार का यह निर्णय भी किसान हित में नहीं है। निर्यात पर रोक नहीं होना चाहिए। सरकार किसानों का भला चाहती है तो गेहूं खरीद का समर्थन मूल्य बढ़ाए और डीजल-खाद आदि की कीमत घटाए।
लखनऊ की कंपनी खरीदती है गेहूं
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में किसानों का गेहूं लखनऊ की एक निर्यातक कंपनी भी खरीदती है। उसने यहां अपने चार बड़े गल्ला व्यापारियों को एजेंट के रूप नियुक्त कर रखा है। यह खरीद बांदा और हमीरपुर में ज्यादा होती है। कंपनी द्वारा खरीदा गया गेहूं कानपुर मंडी भेजा जाता है। (संवाद)