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एक और प्रवासी मजदूर झूल गया फांसी पर

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बांदा। लॉकडाउन में महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों द्वारा पैतृक गांवों में काम न मिलने से आर्थिक तंगी के पैदा हुए हालात के बीच आत्महत्याओं का सिलसिला जारी है। ताजी घटना मेें 32 वर्षीय प्रवासी मजदूर ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वह डेढ़ माह पहले दिल्ली से लौटा था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पिछले एक माह में करीब आधा दर्जन प्रवासी मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं।
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गिरवां थाना क्षेत्र के गंगापुरवा गांव में प्रवासी मजदूर धर्मेंद्र (32) पुत्र इंद्रजीत ने शुक्रवार की शाम घर से करीब 500 मीटर दूर खेत में जामुन के पेड़ पर रस्सी बांधी और दूसरा छोर गर्दन में बांधकर फांसी पर झूल गया। सुबह वहां पहुंचे ग्रामीणों ने शव फंदे पर लटका देखा। परिजनों को सूचना दी। मृतक के भाई जितेंद्र सिंह ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा प्रक्रिया पूरी करके पोस्टमार्टम के लिए राजकीय मेडिकल कालेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। वहां रविवार को पोस्टमार्टम हुआ। मृतक अविवाहित था।
मृतक के बड़े भाई ज्ञान सिंह ने बताया कि इंद्रजीत तीन भाइयों में मंझला था। रोजगार की तलाश में जनवरी 2019 में दिल्ली चला गया था। वहां दिहाड़ी पर मजदूरी करता था। लॉकडाउन लागू होने के बाद करीब डेढ़ माह पहले अप्रैल में गांव लौट आया था। ज्ञान ने यह भी बताया कि बड़ी बहन की शादी का रिश्ता तय हो गया है। अगले साल शादी होनी है। शादी के लिए सभी भाइयों ने जिम्मेदारी ली है, लेकिन काम न मिलने से परेशान था। उसका मनरेगा जॉबकार्ड भी नहीं बना था। भाई ने मौत की वजह आर्थिक तंगी से परेशान होना बताया।
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