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बूचड़खानों पर रोक से बढ़ेगी अन्ना की जमात

Wed, 22 Mar 2017 12:22 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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अन्ना मवेशी। - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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विधान सभा चुनाव के पूर्व अपने संकल्प पत्र में प्रदेश के बूचड़खाने (स्लाटर हाउस) बंद करने की घोषणा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अमल शुरू कराए जाने का सीधा असर बुंदेलखंड की अन्ना प्रथा पर भी पड़ेगा। बूचड़खानों पर रोक लगने से वहां भेजी जा रही अनुपयोगी और गैर दुधारू भैंस व पड़वे अब अन्ना पशुओं का झुंड और बढ़ाएंगे। मंडल में पहले से ही साढ़े तीन लाख अन्ना गायें हैं। चित्रकूटधाम मंडल से हर हफ्ते लगभग 2000 मवेशी बूचड़खानों को बेंचे जाते थे। लगभग 1000 परिवारों को इससे रोजगार मिला हुआ था।  

दैवी आपदाओं से साल दर साल घट रही फसल ने पशुओं के चारा-भूसा का संकट खड़ा कर दिया। ऐसे में किसानों और पशुपालकों को मवेशी पालना दूभर हो गया। बड़ी तादाद में गायों को अन्ना छोड़ दिया गया है। पशु पालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में अन्ना गायों की तादाद साढ़े तीन लाख का आंकड़ा पार कर गई है। बांदा में 82,000, महोबा में 85,000, चित्रकूट में 1,10,000 और हमीरपुर में साढ़े 70 हजार अन्ना पशु हैं।
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यह झुंड फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। सड़कों पर अन्ना गायों के झुंड से दुर्घटनाएं हो रही हैं। तमाम आंदोलनों और किसानों की हायतौबा के बाद भी शासन या प्रशासन अन्ना गायों के लिए कोई ठोंस कदम नहीं उठा सका।
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 अब तक अन्ना पशुओं में सिर्फ गाय ही शामिल हैं। भैंस नजर नहीं आतीं। भैंसों के दूध देना बंद कर देने पर उन्हें मवेशी बाजारों के जरिए स्लाटर हाउस को बेंच दिया जा रहा है। लेकिन अब प्रदेश की नई सरकार द्वारा स्लाटर हाउसों पर पाबंदी लगाए जाने से यहां आपूर्ति की जा रहीं भैंस और पड़वों को मजबूरन पशु पालक अन्ना छोड़ेंगे। जिससे बुंदेलखंड की अन्ना समस्या और गहरा जाएगी।

 
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