बांदा। अन्ना गायों को भुखमरी से बचाने के लिए चलाए
जा रहे मदद मिशन में काफी दिल पसीजे हैं, लेकिन अभी यह मदद नाकाफी हैं।
जितनी बड़ी संख्या में अन्ना गायों को भूसे की जरूरत है, उतनी मदद नहीं मिल
रही है।
पूरे बुंदेलखंड में अन्ना गायों की समस्या जटिल रूप ले
चुकी है। सबसे ज्यादा प्रभावित किसान हैं। पानी का जुगाड़ कर कुछ जमीन में
बोई फसलें बचाने के लिए किसानों को रात-दिन खेत में बिताना पड़ रहा है।
भूखी
गायेें भूख मिटाने के लिए इधर-उधर मुंह मार रही हैं। बड़ोखर खुर्द गांव
में बड़ी संख्या में अन्ना गायों को ‘काऊ गेस्ट हाउस’ में संरक्षण दिया गया
है।
इसकी मेजबानी प्रगतिशील किसान प्रेमसिंह और पुष्पेंद्र भाई कर रहे हैं। गायों के लिए रोजाना कई क्विंटल भूसे की जरूरत पड़ रही है।
चित्रकूटधाम मंडल से कई पशु प्रेमी और गायों के हमदर्द दान के लिए आगे आए हैं, लेकिन गायों की संख्या के अनुपात में यह नाकाफी है।
ऐसे
में दानदाताओें को और अधिक दरियादिली के साथ गोरक्षा के लिए आगे आना होगा।
बड़ोखर के अलावा जनपद के कई गांवों में भी गौशालाएं संचालित हैं। उनमें भी
दान पुण्य जरूरी है।
विभागाध्यक्ष और कपड़ा व्यवसायी ने किया दान
बांदा।
बड़ोखर स्थित ‘काऊ गेस्ट हाउस’ के लिए भूसे के लिए आर्थिक मदद या दान का
सिलसिला जारी है। बृहस्पतिवार को हमीरपुर और चित्रकूट जनपदों से दान राशि
भेजी गई।
चित्रकूट में स्थित जगतगुरु रामभद्राचार्य विकलांग
विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश कुमार सिंह ने
दो हजार रुपये दान किए। इसी तरह हमीरपुर जनपद के सुमेरपुर नगर निवासी कपड़ा
व्यवसायी धर्मेंद्र सोनी ने 1000 रुपये दान किए हैं।
विधायक ने दिए 51 हजार
बांदा। तिंदवारी के विधायक दलजीत सिंह पचनेही गांव में चल रही गोशाला के लिए दो किश्तों में 51,000 रुपये दान दे चुके हैं।
विधायक
ने इस बात पर असंतोष और विरोध जताया कि प्रदेश सरकार द्वारा पशुओं के भूसे
को जारी कर दिए गए बजट के बावजूद प्रशासन मदद नहीं कर रहा। उन्होंने बताया
कि वे खुद इस बारे में अधिकारियों से कह चुके हैं पर पशुओं के प्रति
अधिकारी संवेदनहीन बने हैं।
40 क्विंटल भूसा ले लिया, भुगतान बाकी
बांदा।
बड़ोखर खुर्द गांव में चल रहे ‘काऊ गेस्ट हाउस’ के संचालक किसान प्रेम
सिंह ने बताया कि सौ से ज्यादा अन्ना गायों को सुबह-शाम भूसा, पानी दिया जा
रहा है।
उन्होंने बताया कि दान दाताओं के भरोसे पुण्य भरे इस काम
को अंजाम दिया जा रहा है। गायों का पेट भरने के लिए लगभग 40 क्विंटल भूसा
मंगाया जा रहा है। इसका भुगतान किया जाना बाकी है। आवश्यकता के मुताबिक अभी
और भूसा खरीदना होगा।