बोधी पुरवा गांव में किसान की मौत पर शोकाकुल परिजन
- फोटो : amarujala
अन्ना मवेशियों के फसल सफाचट करने के सदमे से एक और किसान की मौत हो गई। खेती-किसानी के लिए उसने गांव के कई लोगों से डेढ़ लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। बगैर पोस्टमार्टम कराए परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। 48 घंटे में किसान की मौत की यह दूसरी घटना है।
मटौंध थाना क्षेत्र के बोधी पुरवा गांव का मुल्लू उर्फ दम्मू (55) पुत्र गजुवा मुस्लिम गुरुवार सुबह फसल देखने खेत गया था। क्योंकि अन्ना मवेशी फसल चटाचट कर गए थे यह देख उसे गहरा सदमा लगा। वह लड़खड़ाकर खेत की मेड़ पर बेहोश होकर गिर पड़ा। आसपास काम रहे किसानों ने पानी के छींटे मारकर उसे होश में लाने का प्रयास किया और परिजनों को सूचना दी।
ग्रामीणों से जानकारी पाकर परिजन 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दोपहर बाद बगैर पोस्टमार्टम कराए परिजनों ने गांव के कब्रिस्तान में शव को दफना दिया। पुत्र हसन ने बताया कि पिता के नाम पांच बीघा जमीन है। जिसमें गेहूं की फसल बोई थी। लगातार दो साल से सूखा पड़ने से पैदावार नहीं हुई। अबकी अच्छी फसल की उम्मीद थी। लेकिन अन्ना मवेशियों ने गेहूं की पूरी फसल चर डाली।
बताया कि खेती किसानी के लिए उसने गांव के कई लोगों से डेढ़ लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। भाई लोटन ने बताया कि रुपये उधार देने वाले भी उससे तगादा करते थे। फसल चरने और कर्ज का ब्याज बढ़ने पर वह चिंतित रहता था। उधर, एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह का कहना है कि मृतक के परिजनों ने उन्हें सूचना नहीं दी है। जानकारी मिली है तो वह खुद गांव जाकर पीड़ित परिवार से मिलेंगे। परिवार को नियमानुसार सहायता दिलाई जाएगी।
गौरतलब है कि 48 घंटे के अंदर किसान की दूसरी मौत हो है। इसके पूर्व मंगलवार यानी 7 मार्च को नरैनी क्षेत्र के पनगरा गांव में अन्ना मवेशियों के फसल चर जाने के सदमे में छकना प्रजापति (60) की मौत हो गई थी। तीन साल के अंदर किसान के परिवार पर दूसरी बार कुदरत का कहर टूटा है। तीन साल पूर्व मृतक के पुत्र भूरा की खेत की सिंचाई करते समय करंट लगने से मौत हो गई थी। बिजली विभाग द्वारा अभी तक मुआवजा न दिए जाने से परिजनों में रोष है।